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सियासत का ‘सुपर पावर सेंटर’ कौन? डॉ. रमन सिंह के इर्द-गिर्द क्यों घूमती है छत्तीसगढ़ की राजनीति?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में सत्ता के समीकरण भले बदल गए हों, चेहरे बदल गए हों और नई पीढ़ी के नेताओं का प्रभाव बढ़ा हो, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक मौजूदगी आज भी अपनी अलग अहमियत रखती है। करीब डेढ़ दशक तक प्रदेश की सत्ता का नेतृत्व करने वाले डॉ. रमन सिंह को राजनीतिक गलियारों में आज भी ऐसा वरिष्ठ चेहरा माना जाता है, जिसकी भूमिका को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ की सियासत में उन्हें लेकर अक्सर यह चर्चा सुनाई देती है कि वे आज भी ‘बिग बॉस’ की भूमिका में दिखाई देते हैं।डॉ. रमन सिंह का राजनीतिक प्रभाव केवल मुख्यमंत्री के रूप में बिताए लंबे कार्यकाल तक सीमित नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के संगठन, सरकार और प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं की एक ऐसी पीढ़ी देखी है, जो आज सत्ता और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भी उनका अनुभव और संगठनात्मक समझ कई मौकों पर चर्चा का विषय बनती है।प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार अपना अलग राजनीतिक और प्रशासनिक स्वरूप स्थापित कर रही है। मंत्रिमंडल में नए चेहरों को अवसर मिला है, संगठन में भी नई जिम्मेदारियां और नई रणनीतियां दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद डॉ. रमन सिंह का कद ऐसा है कि प्रदेश की राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण करते समय उनका नाम स्वाभाविक रूप से सामने आ जाता है।विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका ने इस राजनीतिक कद को एक नया आयाम भी दिया है। सदन की कार्यवाही संचालित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ उनके पास प्रदेश की राजनीति का लंबा अनुभव है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं के साथ उनका पुराना राजनीतिक संबंध रहा है। इसलिए विधानसभा की राजनीति में भी उनके अनुभव और फैसलों पर स्वाभाविक रूप से नजर रहती है।हालांकि ‘बिग बॉस’ जैसी राजनीतिक उपमा को शाब्दिक अर्थ में सत्ता के नियंत्रण के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह अधिकतर उस राजनीतिक प्रभाव, वरिष्ठता और स्वीकार्यता को व्यक्त करती है, जो किसी लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहे नेता के साथ जुड़ जाती है। डॉ. रमन सिंह के मामले में यह प्रभाव उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल, संगठनात्मक अनुभव और प्रदेश की राजनीति में उनकी निरंतर सक्रियता से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।छत्तीसगढ़ भाजपा की वर्तमान राजनीति में कई नेता अपने-अपने स्तर पर प्रभावशाली हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, संगठन अपनी रणनीति के अनुसार आगे बढ़ रहा है और नई राजनीतिक पीढ़ी भी लगातार मजबूत हो रही है। ऐसे में डॉ. रमन सिंह की भूमिका को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे केवल वरिष्ठ मार्गदर्शक की भूमिका में हैं या अब भी प्रदेश भाजपा की राजनीति के बड़े फैसलों पर उनका प्रभाव कायम है?राजनीति में किसी नेता का वास्तविक प्रभाव केवल पद से तय नहीं होता। कई बार पद बदल जाता है, लेकिन राजनीतिक कद और स्वीकार्यता बनी रहती है। डॉ. रमन सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही नजर आता है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी वे प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में बने रहे और अब विधानसभा अध्यक्ष के संवैधानिक पद पर हैं। इस वजह से उनके राजनीतिक अनुभव को सत्ता और संगठन दोनों ही नजरों से महत्वपूर्ण माना जाता है।विपक्ष के लिए भी डॉ. रमन सिंह का राजनीतिक अतीत लगातार निशाने पर रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल समय-समय पर उनके लंबे शासनकाल और भाजपा की पूर्व सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा के भीतर उनका समर्थक वर्ग उन्हें अनुभवी नेता और मार्गदर्शक के रूप में देखता रहा है। यही विरोधाभास उनके राजनीतिक प्रभाव को और चर्चा में रखता है।आज छत्तीसगढ़ की राजनीति एक संक्रमण के दौर से गुजर रही है। एक तरफ अनुभवी नेताओं का प्रभाव कायम है, तो दूसरी तरफ नई राजनीतिक पीढ़ी अपने लिए जगह बना रही है। ऐसे समय में डॉ. रमन सिंह की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होना स्वाभाविक है। सवाल यह नहीं कि वे प्रत्यक्ष रूप से कितने फैसले लेते हैं, बल्कि सवाल यह है कि प्रदेश की राजनीति में उनकी राय, अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता का वजन कितना है।यही वजह है कि छत्तीसगढ़ की सियासत में जब भी सत्ता के भीतर के समीकरण, संगठन की रणनीति, मंत्रियों की सक्रियता, प्रशासनिक फैसलों या भाजपा के भविष्य की राजनीति पर चर्चा होती है, तो डॉ. रमन सिंह का नाम किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाता है। तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके नेता के रूप में उनकी राजनीतिक विरासत इतनी मजबूत है कि उन्हें प्रदेश की राजनीति के वर्तमान समीकरणों से पूरी तरह अलग करके देखना संभव नहीं है।राजनीति का इतिहास बताता है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता सत्ता से बाहर होने के बाद भी अचानक अप्रासंगिक नहीं हो जाते। उनका अनुभव, नेटवर्क और राजनीतिक प्रभाव कई वर्षों तक बना रहता है। डॉ. रमन सिंह भी इसी राजनीतिक परंपरा के प्रतिनिधि नजर आते हैं। आज वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनकी मौजूदगी और प्रभाव को लेकर चर्चा अब भी जारी है।आने वाले समय में भाजपा सरकार के कामकाज, संगठनात्मक बदलाव और प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा से यह और स्पष्ट होगा कि डॉ. रमन सिंह की भूमिका केवल वरिष्ठ मार्गदर्शक की है या उनकी राजनीतिक सलाह और अनुभव अब भी बड़े फैसलों के पीछे महत्वपूर्ण कारक हैं। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में चेहरे भले बदल रहे हों, लेकिन डॉ. रमन सिंह का राजनीतिक कद अभी भी ऐसा है कि उन्हें नजरअंदाज कर प्रदेश की पूरी राजनीतिक तस्वीर पढ़ना मुश्किल है।सियासत में कुर्सियां बदलती रहती हैं, सत्ता के समीकरण बदलते रहते हैं, लेकिन कुछ नेताओं का राजनीतिक प्रभाव पद से बड़ा हो जाता है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में डॉ. रमन सिंह का नाम आज भी इसी श्रेणी में लिया जाता है—जहां उन्हें ‘बिग बॉस’ कहना भले राजनीतिक भाषा का हिस्सा हो, लेकिन उनकी वरिष्ठता और प्रभाव से इनकार करना आसान नहीं।

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