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संपादक की कलम से…*सिक्छक दिवस: गियान के दीया ले समाज के भविस गढ़े के महापरब।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

सिक्छक दिवस हमर समाज बर एक अइसन अवसर आय, जेन दिन हमन ओ महान हस्ती मन ला नमन करथन, जेन मन अपन पूरा जिनगी के मेहनत, लगन अउ समर्पण ले नवा पीढ़ी के भविस गढ़े के काम करथें। सिक्छक सिरिफ इसकुल म पढ़ाय-लिखाय करे वाला मनखे नइ होय, बल्कि वो समाज के दिशा देखाय वाला, संस्कार देय वाला अउ जिनगी के सही रद्दा बताय वाला मार्गदरसक होथे।कहिथें कि एक सिक्छक के हाथ म देश के भविस के डोर होथे। काबर कि आज के लइका मन कल के डाक्टर, इंजीनियर, किसान, अधिकारी, नेता अउ समाज के जिम्मेदार नागरिक बनहीं। अउ इन सबके नींव एक सिक्छक के मेहनत अउ मार्गदरसन ले तैयार होथे। सिक्छक अपन ज्ञान के उजियारा ले अज्ञान के अंधियारी ला दूर करथे अउ मनखे ला अपन क्षमता पहिचाने के हिम्मत देथे।छत्तीसगढ़ के धरती ह सदा ले गियान, संस्कार अउ परंपरा के धनी रहिस। हमर गांव-गांव के इसकुल म काम करे वाले सिक्छक मन कठिन परिस्थिति म घलो अपन जिम्मेदारी निभावत आय हें। कई बेर साधन के कमी, सुविधा के अभाव अउ अनेक चुनौती के बाद घलो वो मन लइका मन के पढ़ई अउ उज्जर भविस बर लगातार मेहनत करत रहिथें। गांव के एक छोटकुन इसकुल ले निकले लइका जब बड़े मुकाम हासिल करथे, त ओकर सफलता के पाछू म सिक्छक के मेहनत के बहुत बड़े योगदान होथे।आज के समय म सिक्षा के क्षेत्र म बहुत बदलाव आय हवय। डिजिटल माध्यम, स्मार्ट क्लास, इंटरनेट अउ नवा तकनीक मन पढ़ई के तरीका ला बदल दे हवय। फेर चाहे जमाना कतको बदल जाय, सिक्छक के महत्व कभू कम नइ हो सकय। मशीन जानकारी दे सकथे, फेर एक सिक्छक जइसने समझ, संवेदना, संस्कार अउ सही निर्णय लेय के क्षमता नइ दे सकय। सिक्छक ह लइका के भीतर छुपे प्रतिभा ला पहिचान के ओकर आत्मविश्वास बढ़ाथे।आज जरूरत हवय कि समाज अउ सरकार दुनो सिक्छक मन के सम्मान अउ गरिमा ला अउ मजबूत करंय। सिक्छक ला सिरिफ पाठ्यक्रम पूरा करे वाला कर्मचारी के रूप म नइ, बल्कि समाज निर्माता के रूप म देखे के जरूरत हवय। जेन सिक्छक मन कठिन परिस्थिति म घलो अपन कर्तव्य ला सर्वोच्च मान के काम करथें, वो मन समाज के असली नायक आयं।सिक्छक के जिम्मेदारी आज पहिली ले घलो जादा बढ़ गे हवय। आज के लइका मन के सामने नई-नई चुनौती हवय। मोबाइल, इंटरनेट अउ बदलत जीवन शैली के बीच सिक्छक मन ला सिरिफ किताब के ज्ञान नइ, बल्कि नैतिक मूल्य, अनुशासन, संस्कार अउ जिम्मेदारी के भावना घलो देय के जरूरत हवय। एक अच्छा सिक्छक अपन विद्यार्थी ला सिरिफ परीक्षा म सफल होय बर नइ, बल्कि जिनगी म सफल अउ अच्छा इंसान बने बर तैयार करथे।हमर समाज ला ये समझना जरूरी हवय कि इसकुल के चार दिवारी म सिरिफ पढ़ई नइ होवय, बल्कि पूरा समाज के भविस के निर्माण होथे। एक सिक्छक के प्रेरणा ले गरीब घर के लइका घलो अपन सपना पूरा कर सकथे। एक सिक्छक के भरोसा ले निरास मन म नया उम्मीद के उजियारा जग सकथे।सिक्छक दिवस हमन ला अपन गुरुजन मन के प्रति कृतज्ञता जताय के अवसर देथे। ये दिन हमन ला याद दिलाथे कि जिनगी म जेन मनखे मन हमन ला आगे बढ़े के रद्दा दिखाइन, वो मन के योगदान ला कभू भुलाय नइ जा सकय। गुरु के सम्मान सिरिफ एक दिन के बात नइ, बल्कि हर दिन के संस्कार होना चाही।आवव, ये पावन अवसर म हमन अपन सिक्छक मन ला नमन करव, उनकर मेहनत अउ त्याग ला सम्मान देवव अउ ये संकल्प लेवव कि सिक्षा के उजियारा ला हर गांव, हर घर अउ हर लइका तक पहुंचाय म अपन भूमिका निभाबो।काबर कि एक सिक्छक जब एक लइका के जिनगी गढ़थे, त वो सिरिफ एक मनखे नइ, बल्कि पूरा समाज के भविस गढ़थे।सिक्छक दिवस के पावन अवसर म हमर सब्बो गुरुजन मन ला कोटि-कोटि पयलगी।

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