
नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ,(सर्वव्यापी)
करोड़ों रुपये खर्च कर हर साल हरियाली बढ़ाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन मरवाही वनमंडल के खोडरी परिक्षेत्र स्थित जरहापारा प्लांटेशन में चल रहे कार्य ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वसनीय विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिस वनरक्षक को पहले अनियमितताओं के आरोपों में निलंबित किया गया था और बाद में नर्सरी में कथित लापरवाही एवं गबन के आरोपों के बाद वहां से हटाकर विशेष ड्यूटी पर भेजा गया था, उसी कर्मचारी से अब दोबारा प्लांटेशन कार्य कराए जाने का दावा किया जा रहा है।
यदि सूत्रों के दावे सही हैं, तो यह केवल एक कर्मचारी की जिम्मेदारी का मामला नहीं, बल्कि विभागीय निर्णय प्रक्रिया, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार संबंधित वनरक्षक राकेश राठौर से खोडरी परिक्षेत्र के जरहापारा परिसर में प्लांटेशन कार्य कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कार्य परिक्षेत्र अधिकारी की निगरानी में चल रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस कर्मचारी के विरुद्ध पहले विभाग कार्रवाई कर चुका था, उसे फिर उसी प्रकृति के कार्य की जिम्मेदारी किस आधार पर और किसके आदेश से सौंपी गई?
एस्टीमेट पर भी सवाल, गुणवत्ता पर भी संदेह
विभागीय सूत्रों का आरोप है कि प्लांटेशन कार्य स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) के अनुरूप नहीं किया जा रहा। आरोप है कि लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी में निर्धारित मापदंडों के अनुसार गड्ढे तैयार नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा आसपास के जंगलों से छोटे पौधे लाकर रोपण किए जाने की भी बात सामने आई है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि पौधों के संरक्षण के लिए आवश्यक खाद, उर्वरक एवं कीटनाशकों का पर्याप्त उपयोग नहीं किया जा रहा। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे प्लांटेशन की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
बड़े सवाल
1- जिस कर्मचारी पर पहले कार्रवाई हुई, उसे दोबारा प्लांटेशन का जिम्मा किसके आदेश से दिया गया?
2- क्या यह निर्णय विभागीय नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप है?
3-क्या जरहापारा प्लांटेशन में स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार ही कार्य कराया जा रहा है?
4-क्या नर्सरी के बजाय जंगल से पौधे लाकर रोपण किया जा रहा है?
5- खाद, उर्वरक और पौध संरक्षण सामग्री का उपयोग रिकॉर्ड के अनुरूप हुआ या नहीं?
6- यदि अनियमितता मिली तो जवाबदेही किस अधिकारी की तय होगी?
क्या कहते हैं नियम?
वन विभाग में किसी भी प्लांटेशन कार्य को स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप कराना अनिवार्य होता है। गड्ढों का आकार, पौधों की गुणवत्ता, पौधों का स्रोत, खाद-उर्वरक एवं संरक्षण संबंधी व्यवस्थाएं सभी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर इन मानकों की अनदेखी होती है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
जांच की मांग तेज
विभागीय सूत्रों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जरहापारा प्लांटेशन का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए तथा यह परखा जाए कि कार्य स्वीकृत एस्टीमेट और विभागीय मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।




