तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में होमगार्ड यानी नगर सैनिकों के लंबित एरियर्स, सेवा संबंधी विसंगतियों और लंबे समय से अधूरी पड़ी मांगों को लेकर एक बार फिर विभागीय व्यवस्था और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। नगर सैनिकों की मांग है कि वर्ष 2022 से अक्टूबर 2026 तक की पात्र बकाया राशि का भुगतान अक्टूबर माह के अंत तक सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि यदि न्यायालयों के आदेशों के अनुरूप देय राशि और अन्य सेवा लाभ समय पर नहीं मिलते हैं, तो जवानों के साथ अन्याय की स्थिति बनी रहेगी। इस संबंध में डीजी होमगार्ड एवं छत्तीसगढ़ शासन से तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित मामलों का निराकरण करने की मांग की जा रही है।नगर सैनिकों से जुड़ा सबसे अहम मुद्दा वर्ष 2023 में मानदेय वृद्धि के बाद कथित तौर पर बकाया लगभग 48 हजार रुपये की राशि का है। संबंधित जवानों का कहना है कि यह राशि अब तक उनके खातों में हस्तांतरित नहीं की गई है। सवाल यह है कि यदि यह राशि नियमानुसार देय है, तो इसके भुगतान में देरी क्यों हो रही है? जवानों को उनके अधिकारों के लिए बार-बार इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? शासन और विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए पात्र कर्मचारियों का बकाया तत्काल जारी करना चाहिए।नगर सैनिकों की मांग है कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। वर्ष 2022 से अक्टूबर 2026 तक की पात्र एरियर्स राशि की गणना कर अक्टूबर माह के अंत तक भुगतान की समयसीमा तय की जाए। साथ ही, महंगाई भत्ते यानी डीए की दरों में समय-समय पर होने वाली वृद्धि के अनुरूप नगर सैनिकों को देय लाभ का स्पष्ट निर्धारण किया जाए। उनका कहना है कि भुगतान की गणना में महंगाई भत्ते की बढ़ी हुई दरों को शामिल करने के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि जवानों को उनके वास्तविक देय लाभ से वंचित न रहना पड़े।छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की दरों में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। ऐसे में नगर सैनिकों के मानदेय और अन्य देय लाभों की गणना किस आधार पर की जा रही है, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। यदि संबंधित नियमों, शासनादेशों अथवा न्यायालय के निर्देशों के तहत नगर सैनिक किसी अतिरिक्त भुगतान के पात्र हैं, तो विभाग को उसकी गणना और भुगतान की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि पात्र जवानों तक उसका लाभ पहुंचना भी जरूरी है।नगर सैनिकों की छह प्रमुख मांगों में पहली मांग सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की है। उनका तर्क है कि अन्य वर्दीधारी बलों के समकक्ष सेवा अवधि निर्धारित करने पर विचार किया जाना चाहिए। दूसरी मांग महिला नगर सैनिकों को शासकीय एवं अर्धशासकीय कर्मचारियों के समतुल्य 180 दिनों का प्रसूति अवकाश देने की है। तीसरी मांग वर्ष 2023 में मानदेय वृद्धि के बाद कथित तौर पर लंबित लगभग 48 हजार रुपये के एरियर्स का तत्काल भुगतान है।चौथी मांग अन्य वर्दीधारी विभागों की तर्ज पर नगर सैनिकों के लिए वरिष्ठता संबंधी पात्रता और लाभों को स्पष्ट नियमों के साथ लागू करने की है। पांचवीं मांग बस्तर संभाग में वर्ष 2023 की अनुकंपा अनुदान राशि के कथित अपूर्ण भुगतान को पूरा कर पात्र हितग्राहियों के खातों में शेष राशि हस्तांतरित करने की है। छठी मांग अन्य वर्दीधारी एवं पुलिस विभाग के कर्मचारियों के समतुल्य किट भत्ता प्रदान करने की है। नगर सैनिकों की मांग है कि किट पेटी संबंधी व्यवस्था के स्थान पर पात्र जवानों को प्रतिवर्ष 8,000 रुपये का किट भत्ता दिया जाए।इन मांगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर सैनिकों की सेवा शर्तों, आर्थिक सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े विषयों का समाधान कब होगा। यदि विभाग के पास इन मांगों को स्वीकार करने अथवा अस्वीकार करने के स्पष्ट नियम और आधार हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे जवानों के बीच बनी अनिश्चितता दूर होगी और प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो सकेगी।नगर सैनिकों की ओर से मांग की जा रही है कि डीजी होमगार्ड इन सभी विषयों पर विभागीय स्तर पर समीक्षा कर शासन को स्पष्ट प्रस्ताव भेजें। राज्य सरकार भी लंबित एरियर्स, महंगाई भत्ते की गणना, सेवानिवृत्ति आयु, महिला नगर सैनिकों के प्रसूति अवकाश, वरिष्ठता, अनुकंपा अनुदान और किट भत्ते पर समयबद्ध निर्णय ले। विशेष रूप से न्यायालय के आदेशों से संबंधित मामलों में आदेशों की वास्तविक स्थिति, पात्रता और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट की जानी चाहिए।अब सवाल सरकार से है—यदि नगर सैनिकों की राशि नियमानुसार देय है, तो भुगतान में देरी क्यों? यदि मांगें नियमों के तहत विचारणीय हैं, तो उन पर निर्णय कब होगा? अक्टूबर माह के अंत तक एरियर्स भुगतान की मांग के बीच नगर सैनिकों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब, पारदर्शी गणना और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा है। राज्य सरकार और विभाग की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर संबंधित जवानों की निगाहें टिकी हुई हैं।


