
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिल्हा विधानसभा क्षेत्र की जर्जर सड़कों को लेकर अब सियासत गरमाने लगी है। कांग्रेस के युवा नेता लक्ष्मीनाथ साहू ने सोशल मीडिया के जरिए क्षेत्र की खराब सड़कों का मुद्दा उठाते हुए बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक को सीधे सवालों के घेरे में खड़ा किया है। सड़क, गड्ढे और आम लोगों की परेशानी को लेकर साहू का यह आक्रामक तेवर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।सवाल सिर्फ सड़कों की बदहाली का नहीं है, बल्कि यह भी है कि जब बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में सड़क व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं की आवाज उतनी मुखर क्यों नहीं सुनाई दे रही? पूर्व विधायक सियाराम कौशिक हों या कांग्रेस के अन्य स्थानीय नेता, आखिर लक्ष्मीनाथ साहू जिस तरह विधायक धरमलाल कौशिक को घेर रहे हैं, उसी तेवर के साथ वे सड़क के सवाल पर सामने क्यों नहीं आ रहे?2023 के विधानसभा चुनाव में बिल्हा से धरमलाल कौशिक भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे, जबकि सियाराम कौशिक कांग्रेस के उम्मीदवार रहे थे। ऐसे में विधानसभा क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं पर सत्ता पक्ष के विधायक से सवाल करना विपक्ष की स्वाभाविक राजनीतिक भूमिका मानी जाती है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह जिम्मेदारी अपेक्षाकृत ज्यादा मुखर होकर लक्ष्मीनाथ साहू निभाते दिखाई दे रहे हैं—कम से कम सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता से ऐसा राजनीतिक संदेश जरूर बन रहा है।लक्ष्मीनाथ साहू का सवाल सड़क तक सीमित नहीं है। उनके तेवर से यह संदेश निकल रहा है कि जनता के रोजमर्रा के मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाया जाना चाहिए। जर्जर सड़कें किसी एक दल की समस्या नहीं होतीं; इनका सीधा असर आम नागरिक, विद्यार्थी, किसान, व्यापारी और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ता है।यही वजह है कि अब चर्चा इस बात की भी होने लगी है कि क्या बिल्हा में विपक्षी राजनीति केवल चुनावी समय में सक्रिय होती है या जनता की समस्याओं को लेकर लगातार सड़क से सदन तक आवाज उठाने की कोई ठोस रणनीति भी है?दूसरी ओर, विधायक धरमलाल कौशिक से भी यह सवाल पूछा जाना स्वाभाविक है कि जिन सड़कों को लेकर क्षेत्र से शिकायतें और राजनीतिक सवाल सामने आ रहे हैं, उनके सुधार की वर्तमान स्थिति क्या है? कौन-कौन सी सड़कें स्वीकृत हैं, किनका निर्माण या मरम्मत प्रस्तावित है, कितने कार्य पूरे हुए हैं और किन सड़कों पर अभी काम बाकी है—इन सवालों पर यदि विधायक अथवा संबंधित विभाग स्पष्ट जानकारी सामने रखता है तो राजनीतिक बहस अधिक तथ्यपरक हो सकती है।फिलहाल बिल्हा की राजनीति में सड़क का गड्ढा केवल सड़क पर नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श में भी दिखाई देने लगा है। लक्ष्मीनाथ साहू के लगातार सवालों ने कांग्रेस के भीतर भी एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है—जब सड़कें जनता को परेशान कर रही हैं तो विपक्ष के बाकी नेता धरमलाल कौशिक को घेरने में पीछे क्यों हैं?आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लक्ष्मीनाथ साहू के सवालों का जवाब विधायक धरमलाल कौशिक या संबंधित विभाग तथ्यों के साथ देता है या फिर बिल्हा की जर्जर सड़कें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का एक और मुद्दा बनकर रह जाती हैं।



