
विकास नंद (सर्वव्यापी)
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन प्राप्त करने के दौरान यदि किसी हितग्राही का फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक मशीन में मैच नहीं होता है, तो उसे राशन से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में पात्र हितग्राहियों को राहत देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान है। इसके तहत नियमानुसार नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) अथवा ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से भी राशन प्राप्त किया जा सकता है।खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं है कि संबंधित हितग्राही को राशन नहीं मिल सकता। विशेष रूप से बुजुर्गों और उन लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, जिन्हें उम्र या अन्य कारणों से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बायोमेट्रिक समस्या के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
रायपुर जिले के खाद्य नियंत्रक ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हितग्राहियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था की गई है। यदि किसी पात्र हितग्राही का फिंगरप्रिंट मशीन में मैच नहीं होता है, तो नियमानुसार उपलब्ध अन्य माध्यमों से राशन प्राप्त करने की सुविधा मिल सकती है।विभाग के अनुसार, बुजुर्गों सहित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में कठिनाई का सामना करने वाले हितग्राही निर्धारित प्रक्रिया के तहत नामांकित व्यक्ति या ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण का विकल्प अपना सकते हैं।
भ्रम में न रहें हितग्राही, जानें अपने अधिकार
खाद्य विभाग ने फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने के कारण राशन नहीं मिलने संबंधी जानकारी को भ्रामक और अधूरा बताया है। विभाग का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान पहले से मौजूद है।इसलिए हितग्राहियों को केवल फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के कारण निराश होकर वापस लौटने के बजाय राशन दुकान संचालक से वैकल्पिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर संबंधित खाद्य विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है।
खाद्य विभाग का स्पष्ट संदेश है कि फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होना अपने आप में पात्र हितग्राही को राशन से वंचित करने का आधार नहीं है। वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी आम लोगों तक पहुंचने से विशेषकर बुजुर्गों और जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सकती है।



