
विकास नंद/ सर्वव्यापी


नारकोटिक्स के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अब पुलिस की जांच का फोकस केवल आरोपियों की गिरफ्तारी और सजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नशे से अर्जित अवैध संपत्ति और उसके पूरे वित्तीय नेटवर्क को भी निशाना बनाया जाएगा। इसी उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में नारकोटिक्स मामलों की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर के उप पुलिस अधीक्षक से सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के 70 पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला में एडीजी अमित कुमार ने कहा कि नारकोटिक्स अपराधियों को सजा दिलाना ही पर्याप्त नहीं है। नशे के अवैध कारोबार से कमाई गई संपत्ति की पहचान, उसे जब्त करना और अपराध से जुड़े आर्थिक तंत्र को तोड़ना भी जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए।उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी है कि नारकोटिक्स पदार्थ कहां से आ रहा है, कौन इसकी आपूर्ति कर रहा है और किन लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इन सभी कड़ियों को जोड़ते हुए फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक स्थापित किए जाएं तथा साथ-साथ वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जाए। इससे नशे के कारोबार के पीछे सक्रिय पूरे वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
अवैध कमाई की जड़ तक पहुंचेगी जांच
उप पुलिस महानिरीक्षक नारकोटिक्स पारुल माथुर ने कहा कि एनडीपीएस मामलों की विवेचना में विभिन्न संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।उन्होंने नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए सप्लाई रिडक्शन, डिमांड रिडक्शन, हार्म रिडक्शन और रिहैबिलिटेशन को साथ लेकर समग्र रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इनकम टैक्स और जीएसटी विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
कार्यशाला के प्रथम सत्र में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग, रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश चंद्र चौहान ने वित्तीय जांच के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि वित्तीय जांच के माध्यम से नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल होने वाले धन के स्रोत और उसके निवेश के ठिकानों का पता लगाया जा सकता है।
द्वितीय सत्र में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स, रायपुर के एडिशनल असिस्टेंट डायरेक्टर सलमान इम्तियाज हुसैनी ने जीएसटी संबंधी आंकड़ों और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के जरिए अवैध धन की पहचान करने के तरीकों की जानकारी दी।कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनामिका जैन सहित पुलिस मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।




