
नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ (सर्वव्यापी)
जैसे-जैसे 7 अगस्त की तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे टीकर शरीफ, पेण्ड्रा रोड की पावन फिजा रूहानियत से महकने लगी है। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोहम्मद बशीर जहांगीर शाह (रहमतुल्लाह अलैह) की ऐतिहासिक दरगाह पर आयोजित होने वाला 37वाँ सालाना उर्स मुबारक इस बार भी हजारों अकीदतमंदों की आस्था का केंद्र बनने जा रहा है।
चार दिनों तक चलने वाला यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सूफी परंपरा, इंसानियत, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उत्सव है।टीकर शरीफ की यह ऐतिहासिक दरगाह वर्षों से उन लोगों की मंजिल रही है, जो सुकून, दुआ और आध्यात्मिक शांति की तलाश में यहां पहुंचते हैं। हर साल यहां प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों जायरीन हाजिरी देकर अपनी अकीदत पेश करते हैं।
मान्यता है कि इस दरगाह से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता और यहां की गई दुआएं अल्लाह की बारगाह में कबूल होती हैं। यही कारण है कि उर्स के दौरान टीकर शरीफ की फिजा इबादत, मोहब्बत और भाईचारे के रंग में रंग जाती है।सज्जादानशीन ख्वाजा मोहम्मद हबीब जहांगीरी शाह की सरपरस्ती में आयोजित इस चार दिवसीय उर्स में 7 अगस्त से 10 अगस्त तक परचम कुशाई, चादरपोशी, मीलाद शरीफ, हल्का-ए-जिक्र, कुल शरीफ, शाही संदल और दुआ-ए-खैर सहित विभिन्न धार्मिक रस्में पूरी अकीदत और परंपरा के साथ अदा की जाएंगी। आयोजन समिति ने उर्स की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
9 अगस्त की रात पर टिकी सबकी निगाहें
पूरे उर्स का सबसे बहुप्रतीक्षित आकर्षण 9 अगस्त, रविवार रात 9 बजे आयोजित होने वाली महफिल-ए-सिमाह (कव्वाली) होगी। इस रूहानी महफिल में इंटरनेशनल कव्वाल आर्टिस्ट राजू मुरली अपनी शानदार और दिलकश प्रस्तुति से समा बांधेंगे। सूफियाना कलाम, इश्क-ए-रसूल, औलिया-ए-किराम की शान में पेश की जाने वाली कव्वालियां और आध्यात्मिक रंग में डूबी उनकी आवाज़ श्रोताओं को देर रात तक रूहानी कैफियत में सराबोर करेगी। आयोजन समिति के अनुसार राजू मुरली की प्रस्तुति इस वर्ष के उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण होगी, जिसे सुनने के लिए दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में जायरीन और कव्वाली प्रेमियों के पहुंचने की उम्मीद है।
आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द का भी संदेश
उर्स मुबारक केवल मुस्लिम समाज का आयोजन नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव, सामाजिक एकता और इंसानियत का संदेश देने वाला आयोजन है। हर वर्ष विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग दरगाह पर पहुंचकर चादर पेश करते हैं तथा प्रदेश और देश में अमन, तरक्की, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगते हैं। यही परंपरा टीकर शरीफ की दरगाह को क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित सूफी दरगाहों में विशेष पहचान दिलाती है।
आयोजन समिति ने सभी जायरीन, अकीदतमंदों एवं क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर उर्स की रूहानी महफिलों में शामिल होने और विशेष रूप से 9 अगस्त की रात आयोजित इंटरनेशनल कव्वाल आर्टिस्ट राजू मुरली की शानदार कव्वाली प्रस्तुति का आनंद लेने की अपील की है।
टीकर में उर्स का होगा रूहानी समापन
चार दिनों तक टीकर शरीफ में इबादत, जिक्र, कव्वाली, दुआओं और सूफियाना महफिलों की गूंज रहेगी। एक बार फिर यह ऐतिहासिक दरगाह पूरी शान के साथ यह संदेश देगी कि मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारा और सूफी परंपरा ही समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी ताकत है। 37वाँ सालाना उर्स मुबारक न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि टीकर शरीफ की आध्यात्मिक विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।



