
विकास नंद/सर्वव्यापी

जिले में जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए ग्रीष्मकालीन धान की खेती का रकबा कम करने की तैयारी है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को किसानों को दलहन, तिलहन, मक्का एवं रागी जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने कहा कि ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल उपलब्धता, मिट्टी की प्रकृति और बाजार की मांग के अनुसार वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को किसानों तक शासन की योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए।कृषक उन्नति योजना के तहत धान के बदले अन्य फसल लेने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तथा धान के अतिरिक्त अन्य फसल लेने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। कलेक्टर ने इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित करने को कहा।
पीएम-आशा योजना के तहत दलहन एवं तिलहन उपार्जन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में खरीदी केंद्रों को प्राथमिकता देने तथा किसानों की सुविधा के अनुरूप व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। साथ ही पड़त भूमि और रबी क्षेत्र के बेहतर उपयोग के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
कलेक्टर ने बिना वैध लाइसेंस के उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक बेचने वाली दुकानों पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के शेष हितग्राहियों की ई-केवाईसी, भूमि सीडिंग एवं आधार सीडिंग का कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश भी दिए।उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर के वैज्ञानिकों के साथ समन्वय कर जिले की मिट्टी, संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप दो से तीन विशिष्ट कृषि गतिविधियों का चयन कर उन्हें मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। इससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर उत्पादन और विपणन के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद, उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी तथा कृषि विज्ञान केंद्र भलेसर के प्रमुख वैज्ञानिक उपस्थित रहे।




