
विकास नंद/ सर्वव्यापी

जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति और भुगतान की स्थिति को लेकर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सोमवार शाम समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, लेकिन भुगतान लंबित है, उनका आवश्यक परीक्षण कर अक्टूबर माह तक भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। वहीं, वेंडर्स द्वारा प्रस्तुत लंबित बिलों का नियमानुसार परीक्षण कर पात्रतानुसार भुगतान समय-सीमा में पूरा करने पर जोर दिया।
बैठक में जिले में जल जीवन मिशन के तहत सिंगल विलेज योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी गई। इसके अनुसार, भुगतान के लिए कुल 309 योजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अक्टूबर माह तक इनमें से 215 योजनाओं के भुगतान का लक्ष्य रखा गया है। जानकारी के मुताबिक, 202 योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि 107 योजनाओं से संबंधित कार्य अभी शेष हैं। जिले में योजनाओं के भुगतान के लिए कुल 46 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अधूरे कार्य जल्द पूरे करें, तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी जोर
कलेक्टर लंगेह ने योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर क्लोरीनेटर, बाउंड्रीवाल और स्विच रूम की आवश्यकता है, वहां संबंधित कार्य शीघ्र पूर्ण कराए जाएं, ताकि योजनाओं का संचालन निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वेंडर्स के प्रस्तुत बिलों का परीक्षण नियमानुसार किया जाए और पात्र पाए जाने पर भुगतान की कार्रवाई समय-सीमा में पूरी की जाए। साथ ही, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को फील्ड में रहकर कार्यों की निगरानी करने और शेष कार्यों को जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को मैदानी स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी
बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता देवप्रकाश वर्मा, जल संसाधन विभाग के अजय खरे तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के कार्यपालन अभियंता आशीष कुलदीप सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और वेंडर्स उपस्थित रहे।
अब निगाहें अक्टूबर की समय-सीमा पर: जल जीवन मिशन की योजनाओं के भुगतान और शेष कार्यों को लेकर कलेक्टर के निर्देशों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित समय-सीमा में कितनी योजनाओं का भुगतान पूरा होता है और लंबित कार्यों को धरातल पर कितनी तेजी से पूर्ण किया जाता है।




