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रायपुर की कमान संभाल सकते हैं जितेंद्र शुक्ला! प्रशासनिक गलियारों में तेज हुई चर्चा, बड़े जिले की कलेक्टरी के दावेदारों में नाम सबसे आगे।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर बड़े प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन चर्चाओं के बीच 2011 बैच के आईएएस अधिकारी जितेंद्र शुक्ला का नाम राजधानी रायपुर के कलेक्टर पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में सामने आ रहा है। वर्तमान में शुक्ला मार्कफेड के प्रबंध संचालक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए जितेंद्र शुक्ला को महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी देने की चर्चा लंबे समय से चल रही है। इससे पहले वे जांजगीर-चांपा और बेमेतरा जिले के कलेक्टर रह चुके हैं। दोनों जिलों में उनके कार्यकाल को प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और मैदानी पकड़ के लिए याद किया जाता है।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आगामी प्रशासनिक फेरबदल में जितेंद्र शुक्ला को राजधानी रायपुर की जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बिलासपुर जिले के कलेक्टर पद को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा है, लेकिन वर्तमान कलेक्टर संजय अग्रवाल का कार्यकाल अभी लगभग डेढ़ वर्ष के आसपास ही हुआ है, जिसके चलते बिलासपुर में तत्काल बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।राजधानी रायपुर प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यहां प्रशासनिक प्रबंधन के साथ-साथ सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, कानून व्यवस्था, विकास कार्यों की निगरानी और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर कलेक्टर की भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे में जितेंद्र शुक्ला जैसे अनुभवी अधिकारी को रायपुर की जिम्मेदारी मिलने की चर्चा ने प्रशासनिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है।जितेंद्र शुक्ला इससे पहले कलेक्टर, पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक, खाद्य विभाग सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्तमान में भी वे मार्कफेड जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की कमान संभाल रहे हैं। हालांकि अभी तक शासन स्तर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में कलेक्टरों की सूची जारी होती है तो रायपुर की कमान जितेंद्र शुक्ला को सौंपे जाने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।अब सबकी निगाहें मंत्रालय से जारी होने वाले संभावित प्रशासनिक आदेश पर टिकी हुई हैं। अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर ही होगा।

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