
विकास नंद/ सर्वव्यापी
प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से मान्यता प्राप्त वीणापाणि संगीत विद्यालय, बस्ती सरायपाली में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, भक्ति और संगीत के मधुर वातावरण में उत्साहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में संगीत शिक्षार्थियों ने गुरु वंदना, गीत और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने गुरुओं के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं का चरण वंदन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।विद्यालय के संचालक जन्मजय नायक ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मबोध, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। यह दिन उस गुरु तत्व को समर्पित है, जो जीवन को सही दिशा देकर उसे सार्थक बनाता है। उन्होंने कहा कि गुरुओं के प्रति आदर और सम्मान से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
व्यास पूर्णिमा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों, पुराणों और महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना कर सनातन संस्कृति को मजबूत बौद्धिक आधार प्रदान किया।
प्राचार्य सुखनाथ चौहान ने कहा कि गुरु ज्ञान के ऐसे प्रकाश स्तंभ हैं, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर शिष्य को सत्य और सद्मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।
गुरु शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण कर उसके जीवन को नई दिशा देते हैं।कार्यक्रम के दौरान गुरुओं ने संगीत शिक्षण के महत्वपूर्ण गुर साझा किए। वहीं विद्यार्थियों ने भक्ति गीतों और संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर गुरुजनों को संगीतमय आदरांजलि अर्पित की। पूरे आयोजन में श्रद्धा, सम्मान और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की अनुपम झलक देखने को मिली।




