तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए पंजीयन व्यवस्था को लेकर किसानों के सामने नई परेशानी खड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। दावा है कि प्रदेश में 5 डिसमिल से कम रकबे वाले लगभग 20 लाख खसरों को धान पंजीयन से वंचित किया जा रहा है। यदि यह स्थिति सही है, तो इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ सकता है, जिनकी कृषि भूमि का रकबा कम है और जो अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए सरकारी खरीदी व्यवस्था पर निर्भर हैं।सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इतने बड़े स्तर पर खसरों को धान पंजीयन से बाहर करने से पहले किसानों को इसकी जानकारी दी गई है? यदि किसानों को पूर्व सूचना नहीं दी गई है, तो उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने, आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने या किसी त्रुटि को सुधारने का अवसर कैसे मिलेगा?छोटे किसानों के सामने खड़ा हो सकता है संकटछत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कई किसानों के पास बहुत कम कृषि भूमि है। ऐसे में 5 डिसमिल से कम रकबे वाले खसरों को पंजीयन से बाहर किए जाने की स्थिति में प्रभावित किसानों को अपनी उपज की सरकारी खरीदी के संबंध में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि, यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि प्रस्तावित या लागू व्यवस्था में पंजीयन से वंचित किए जाने का आधार क्या है, किन श्रेणियों के खसरों पर यह नियम लागू है और क्या इसके लिए कोई अपवाद अथवा वैकल्पिक प्रक्रिया निर्धारित की गई है।शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर सवालयदि करीब 20 लाख खसरों को धान पंजीयन से बाहर किया जा रहा है, तो शासन और संबंधित विभाग को इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। किसानों को समय रहते नियमों की जानकारी देना, पंजीयन की पात्रता स्पष्ट करना और प्रभावित किसानों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।किसानों के हितों से जुड़े ऐसे निर्णयों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। आखिर छोटे रकबे वाले किसानों को पंजीयन से वंचित करने का आधार क्या है? क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ है? कितने खसरे वास्तव में प्रभावित होंगे और किसानों को राहत पाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी?सरकार से जवाब मांगते अहम सवालक्या 5 डिसमिल से कम रकबे वाले खसरों का धान पंजीयन बंद किया जा रहा है?क्या प्रदेशभर में लगभग 20 लाख खसरे इस व्यवस्था से प्रभावित होंगे?क्या इस संबंध में किसानों को पहले से सूचना दी गई है?कम रकबे वाले किसानों को धान बेचने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था मिलेगी?यदि पंजीयन में कोई त्रुटि है, तो उसे सुधारने और अपील करने का अवसर दिया जाएगा या नहीं?किसानों के हित में जरूरी है कि शासन स्थिति स्पष्ट करे। यदि बड़ी संख्या में खसरे पंजीयन से बाहर हो रहे हैं, तो संबंधित विभाग को नियमों, प्रभावित खसरों की वास्तविक संख्या और किसानों के लिए उपलब्ध विकल्पों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसी भी किसान को जानकारी के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े।




