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महासमुंद मेडिकल कॉलेज में सफल जटिल सर्जरी, 6 किलो की विशाल गांठ निकालकर बचाई प्रसूता की जान।

विकास नंद/ सर्वव्यापी

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय महासमुंद के स्त्रीरोग एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी कर एक प्रसूता की जान बचाने में सफलता हासिल की है। महिला के पेट से लगभग 30×30 सेंटीमीटर आकार और 6 किलोग्राम वजन की विशाल ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय की गांठ) निकाली गई। प्रसव के बाद महिला की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया और सफल सर्जरी कर उसकी जान बचाई।

सामान्य प्रसव के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत

मिली जानकारी के अनुसार, महिला का अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ था। प्रसव के दूसरे दिन उसके पेट में अत्यधिक सूजन, तेज दर्द और खून की गंभीर कमी की समस्या सामने आई। महिला की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल अल्ट्रासोनोग्राफी (USG) जांच कराई। जांच में पेट के भीतर काफी मात्रा में तरल पदार्थ जमा होने की पुष्टि हुई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में सीवियर एसाइटिस कहा जाता है।मरीज की नाजुक हालत और मामले की गंभीरता को देखते हुए स्त्रीरोग विशेषज्ञों ने बिना देर किए एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी (पेट खोलकर स्थिति की जांच एवं आवश्यक सर्जरी) करने का निर्णय लिया।

ऑपरेशन में सामने आई विशाल गांठ

सर्जरी के दौरान चिकित्सकों को पेट के भीतर लगभग 30×30 सेंटीमीटर आकार की विशाल ओवेरियन सिस्ट मिली, जिसका वजन करीब 6 किलोग्राम था। चिकित्सकीय टीम ने अत्यंत सावधानी के साथ जटिल ऑपरेशन करते हुए गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। इस सर्जरी के माध्यम से गंभीर स्थिति से जूझ रही प्रसूता को राहत मिली।

विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

इस जटिल सर्जरी में स्त्रीरोग एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. नेहा ठाकुर, डॉ. प्रतिमा कोशेवारा और डॉ. गरिमा सोलंकी शामिल रहीं। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अमितेश एवं डॉ. अजय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग एवं सहायक स्टाफ से सिस्टर पूजा, सिस्टर तृप्ति सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का भी सहयोग रहा।

प्रसव के बाद असामान्य लक्षणों को न करें नजरअंदाज

यह मामला प्रसव के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। पेट में असामान्य सूजन, तेज दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही चिकित्सकीय निर्णय और त्वरित उपचार गंभीर परिस्थितियों में जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं।महासमुंद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की इस सफलता से जटिल परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और समन्वित प्रयासों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।

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