
विकास नंद/ सर्वव्यापी
कला, अभिनय और सादगी के लिए पहचाने जाने वाले महान अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से व्यथित मां वीणापाणि संगीत विद्यालय, बस्ती सरायपाली में शोकसभा आयोजित कर उन्हें दीपों, पुष्पों और सुरों के माध्यम से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान विद्यालय के कला साधकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने हाथों में दीप लेकर लंबी कतार बनाई। एक-एक कर सभी ने नाना पाटेकर के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किए और पुष्पांजलि अर्पित कर उनके व्यक्तित्व एवं कला योगदान को नमन किया।दीपों की जगमगाती कतार मानो उस कलात्मक प्रकाश का प्रतीक बन गई, जिसे नाना पाटेकर ने अपने अभिनय, प्रभावशाली संवादों और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से लोगों के बीच फैलाया। संगीत और सुरों से गूंजने वाले विद्यालय परिसर में इस दिन मौन और संवेदनाओं का वातावरण छाया रहा।
संवादों में गूंजता था समाज का सच
कार्यक्रम में विद्यालय के संचालक जन्मजय नायक ने साहित्यिक एवं संगीतमय अंदाज में नाना पाटेकर के अभिनय को याद करते हुए कहा कि भारतीय कला जगत का एक ऐसा राग मौन हो गया, जिसकी तान में समाज का सच बोलता था। उनकी आवाज में बादलों की गर्जना जैसी प्रखरता और अंतर्मन की करुणा जैसी संवेदना एक साथ सुनाई देती थी।उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर का संवाद अदायगी का अंदाज किसी सधे हुए शास्त्रीय गायक के आलाप जैसा था, जो गंभीरता और गहराई के साथ सीधे दर्शकों के हृदय को छू जाता था। उनका अभिनय बनावट से दूर, भावनाओं और सच्चाई से जुड़ा हुआ था। उनके चर्चित संवादों में ठहराव, गति और प्रभाव का अनूठा संगम देखने को मिलता था, जो उन्हें भारतीय सिनेमा की विशिष्ट पहचान प्रदान करता था।‘
सुरों के उस्ताद’ के जाने से कला जगत में शोक
विद्यालय के प्राचार्य सुकनाथ चौहान ने कहा कि नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि संवादों की लय और भावों के ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने बिना किसी वाद्य यंत्र के भी दर्शकों के दिलों में संवेदनाओं की तान छेड़ दी। उनका अभिनय और संवाद अदायगी दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ती थी।उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर के जाने से कला जगत ने एक ऐसी विशिष्ट प्रतिभा खो दी, जिसकी प्रखरता और संवेदनशीलता का संगम विरल था। संगीत विद्यालय के प्रांगण में प्रज्वलित दीप उनके प्रति सम्मान और उनकी कलात्मक विरासत को स्मरण करने का माध्यम बने।
सुरों के बीच पसरा मौन, दीपों ने बयां की संवेदनाएं
इस अवसर पर विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी नाना पाटेकर के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि दीपों की यह कतार उनके सम्मान और उनके विचारों की अमरता का प्रतीक है। उनका जीवन कला साधकों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनकी बुलंद आवाज में छिपी संवेदनशीलता और अभिनय की सहजता को दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे।कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात वाद्य यंत्रों पर अत्यंत करुण और शांत धुन प्रस्तुत की गई। सुरों की इस भावपूर्ण प्रस्तुति के बीच दिवंगत अभिनेता की स्मृतियों को नमन करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।शोकसभा में विद्यालय के विद्यार्थी, शिक्षार्थी, शिक्षक, कला साधक और अनेक कला प्रेमी उपस्थित रहे। दीपों की रोशनी और सुरों की भावुक धुन के बीच आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा नाना पाटेकर के प्रति सम्मान, आत्मीयता और कला जगत में उनके योगदान की स्मृतियों को समर्पित रही।



