
कबीरधाम, धनंजय साहू, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
नई दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा दिल्ली पुलिस के जवानों एवं अधिकारियों पर कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और यौन दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए जाने की घटना ने पूरे पत्रकारिता जगत को चिंतित और आक्रोशित किया है। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को जांच के लिए अपराध शाखा को सौंपा है।इस मामले पर ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव , सर्वव्यापी के प्रधान संपादक तरुण कौशिक ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं और महिला पत्रकारों के साथ किसी भी परिस्थिति में अमर्यादित व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अपने पद और वर्दी का दुरुपयोग करते हुए महिला पत्रकारों के साथ कथित तौर पर अनैतिक अथवा आपत्तिजनक व्यवहार किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध बिना किसी दबाव के कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।तरुण कौशिक ने कहा कि पत्रकारों को अपना कर्तव्य निभाने से रोकना, उनके साथ दुर्व्यवहार करना अथवा विशेष रूप से महिला पत्रकारों की गरिमा को ठेस पहुंचाना केवल एक व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना पर प्रहार है। पुलिस से समाज कानून और मर्यादा की रक्षा की अपेक्षा करता है, इसलिए पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों की जांच भी उतनी ही पारदर्शिता और गंभीरता से होनी चाहिए, जितनी किसी आम नागरिक के विरुद्ध लगे आरोपों की होती है।उन्होंने कहा कि जांच को केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय शिकायतकर्ताओं के बयान, उपलब्ध वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। साथ ही महिला पत्रकारों को किसी प्रकार के दबाव, भय या प्रताड़ना का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना भी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।प्रदेश महासचिव कौशिक ने स्पष्ट कहा कि संगठन किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी घोषित करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करने के भी पक्ष में नहीं है। जांच निष्पक्ष हो और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जो भविष्य में किसी भी पुलिसकर्मी को अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग करने से रोकने का स्पष्ट संदेश दे।उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में यदि महिला पत्रकार स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं, तो यह पत्रकारिता और महिला सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पत्रकारों की सुरक्षा केवल किसी एक संगठन या राज्य की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है।ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ छत्तीसगढ़ ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्य सार्वजनिक किए जाएं तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानून के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में प्रदर्शन स्थल पर पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन कराया जाए।ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव , सर्वव्यापी संपादक तरुण कौशिक ने कहा कि “पत्रकार की कलम से सत्ता सवालों के घेरे में आ सकती है, लेकिन पत्रकार की गरिमा से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में असहमति और पत्रकारिता दोनों का सम्मान जरूरी है।”




