
बिलासपुर,भागवत प्रसाद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
पत्रकारिता का पेशा केवल खबर लिखने और प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ खड़े होना भी पत्रकारिता जगत की बड़ी जिम्मेदारी है। इसी मानवीय भावना का परिचय बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजीत मिश्रा ने उस समय दिया, जब सर्वव्यापी के संपादक तरुण कौशिक मानसिक तनाव और गंभीर व्यक्तिगत परिस्थितियों से गुजर रहे थे।बताया गया कि तरुण कौशिक ने अपनी परेशानी और मानसिक तनाव को लेकर वीडियो साझा किए। इसकी जानकारी मिलते ही प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा तत्काल उनके घर पहुंचे और उनसे मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कठिन समय में अकेलेपन से बाहर निकलने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ परिस्थितियों का सामना करने के लिए उनका मनोबल बढ़ाया। बाद में वरिष्ठ पत्रकार हितेंद्र भारद्वाज भी उनके घर पहुंचे और उनका हालचाल जाना।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पत्रकारिता के क्षेत्र में तमाम मतभेदों और प्रतिस्पर्धा के बावजूद जब कोई साथी कठिन दौर से गुजरता है, तब उसके साथ खड़ा होना ही वास्तविक पत्रकारिता धर्म है। अजीत मिश्रा का तत्काल पहुंचना और हितेंद्र भारद्वाज का बाद में पहुंचकर सहयोग देना इसी मानवीय संवेदना का उदाहरण माना जा सकता है।तरुण कौशिक लंबे समय से कुछ मामलों को लेकर मानसिक और प्रशासनिक दबाव की स्थिति की बात करते रहे हैं। उनका आरोप है कि उनके ही परिचितों अथवा अपनों के माध्यम से उनके खिलाफ षड्यंत्र किए जाते रहे हैं और कुछ प्रभावशाली राजनीतिक लोगों की भूमिका को लेकर उन्होंने पुलिस एवं प्रशासन के समक्ष साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। उनका यह भी कहना है कि साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हो पा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।ऐसे कठिन दौर में किसी व्यक्ति को यह एहसास दिलाना कि वह अकेला नहीं है, अपने आप में बहुत बड़ी सहायता होती है। अजीत मिश्रा और हितेंद्र भारद्वाज ने जिस संवेदनशीलता के साथ अपने पत्रकार साथी का साथ दिया, वह निश्चित रूप से सराहनीय है।तरुण कौशिक ने अजीत मिश्रा जी और हितेंद्र भारद्वाज जी को हृदय से धन्यवाद एवं आभार। संकट की घड़ी में दिया गया आपका साथ और हौसला शायद शब्दों में पूरी तरह व्यक्त न किया जा सके, लेकिन यह संवेदना हमेशा याद रहेगी।साथ ही, मानसिक तनाव से गुजर रहे हर पत्रकार और हर व्यक्ति से यही आग्रह है कि कठिन समय में स्वयं को अकेला न समझें और किसी भरोसेमंद व्यक्ति, परिवारजन या विशेषज्ञ से तत्काल बात करें। जीवन किसी भी परिस्थिति से बड़ा है।




