
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे रेलटेल के टेलीफोन और वाई-फाई नेटवर्क को लेकर अब मंत्रालयीन अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी सामने आने लगी है। कर्मचारियों का कहना है कि जिस नेटवर्क व्यवस्था से मंत्रालयीन कामकाज को तेज और सुगम बनाने की उम्मीद थी, वही व्यवस्था कई बार परेशानी का कारण बन रही है। नेटवर्क की कमजोरी, कनेक्टिविटी में व्यवधान और बार-बार आने वाली तकनीकी दिक्कतों के कारण अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने रोजमर्रा के शासकीय कार्यों में परेशानी उठानी पड़ रही है।
मंत्रालय में अधिकांश कामकाज अब ऑनलाइन प्रणाली पर निर्भर है। विभागीय पत्राचार से लेकर विभिन्न पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-मेल, ऑनलाइन बैठकों और दूसरे डिजिटल कार्यों के लिए निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी जरूरी हो गई है।
ऐसे में यदि वाई-फाई या टेलीफोन नेटवर्क ही सुचारू रूप से काम नहीं करे तो इसका सीधा असर सरकारी कामकाज की गति पर पड़ना स्वाभाविक है।
मंत्रालयीन सूत्रों के अनुसार, कई अधिकारी और कर्मचारी नेटवर्क संबंधी समस्या को लेकर असंतोष जता रहे हैं। उनका कहना है कि कभी नेटवर्क की गति बेहद धीमी हो जाती है तो कभी कनेक्टिविटी बाधित होने से ऑनलाइन काम बीच में रुक जाता है। टेलीफोन सेवा को लेकर भी कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों के बीच संचार व्यवस्था बाधित होने से विभागीय समन्वय प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंत्रालय जैसे प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र में जब डिजिटल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, तब वहां संचार नेटवर्क की ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है? मंत्रालय में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि नेटवर्क व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो 24 घंटे निर्बाध और भरोसेमंद तरीके से काम करे, क्योंकि मंत्रालय में होने वाला प्रत्येक काम सीधे शासन और प्रशासन से जुड़ा होता है।
कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि बार-बार तकनीकी समस्या सामने आने के बावजूद इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि अस्थायी रूप से समस्या दूर करने के बजाय नेटवर्क की पूरी तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।रेलटेल की सेवाओं को लेकर उठ रही इन शिकायतों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या मंत्रालय में नेटवर्क की तकनीकी क्षमता और कवरेज का परीक्षण कराया जाएगा? क्या अधिकारियों-कर्मचारियों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर व्यवस्था में सुधार होगा? और क्या संचार व्यवस्था को निर्बाध बनाने के लिए जवाबदेही तय की जाएगी?
मंत्रालय प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र है। ऐसे में यहां की संचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लगातार बनी रहने वाली तकनीकी खामी को महज सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कर्मचारियों और अधिकारियों की नाराजगी अब इस बात का संकेत दे रही है कि नेटवर्क व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा कर स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।
आखिर जिस नेटवर्क के भरोसे सरकार का कामकाज चलना है, वही नेटवर्क अगर मंत्रालय में कामकाज रोकने लगे तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?



