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हाईकोर्ट से महज एक किलोमीटर दूर ऊर्जा विहार कॉलोनी बदहाल, कीचड़ और गड्ढों में तब्दील सड़कें; शिकायतों और ज्ञापन के बाद भी नहीं जागा प्रशासन।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत छतौना की ऊर्जा विहार कॉलोनी की तस्वीर विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। बारिश के बाद कॉलोनी की सड़कें कीचड़, पानी और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। आवागमन के लिए बनाई गई सड़क अब राहगीरों के लिए परेशानी और दुर्घटना का कारण बनती दिखाई दे रही है। सामने आई तस्वीर में सड़क की पूरी सतह पर जगह-जगह पानी भरा हुआ है और कच्चा मार्ग दलदल में तब्दील नजर आ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी के संपूर्ण विकास को लेकर कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही मुख्यमंत्री को भी कॉलोनी के संपूर्ण विकास के लिए ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन शिकायतों और मांगों के बावजूद जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। सवाल यह है कि जब राजधानी और न्यायधानी की व्यवस्था विकास की बात करती है, तब हाईकोर्ट से चंद कदमों की दूरी पर बसी एक कॉलोनी बुनियादी सुविधाओं के लिए आखिर कब तक संघर्ष करती रहेगी?स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि तखतपुर क्षेत्र के एक वरिष्ठ भाजपा नेता द्वारा कॉलोनी में विकास कराने का भरोसा दिलाकर यहां प्लॉट और जमीनें बेची गई थीं। लोगों का कहना है कि विकास के वादों के कारण कई परिवारों ने यहां जमीन लेकर अपने भविष्य का सपना देखा, लेकिन आज सड़क, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति देखकर वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और संबंधित नेता का पक्ष भी सामने आना चाहिए।तस्वीर खुद बता रही है कॉलोनी की कहानी30 अगस्त 2026 को सामने आई तस्वीर में ऊर्जा विहार कॉलोनी की सड़क पर जगह-जगह पानी के बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। सड़क का अधिकांश हिस्सा मिट्टी और कीचड़ से भरा है। बारिश का पानी निकलने की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मार्ग की स्थिति और खराब होती जा रही है। ऐसे रास्ते से दोपहिया वाहन चालकों, पैदल चलने वालों और बच्चों को गुजरना मुश्किल हो रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी रहती है।यह स्थिति केवल सड़क की खराब हालत तक सीमित नहीं है, बल्कि नियोजन और कॉलोनी विकास की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि किसी विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्र में सड़क और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी है?सीएम हेल्पलाइन और ज्ञापन के बाद भी समाधान नहींस्थानीय लोगों के मुताबिक शासन तक अपनी समस्या पहुंचाने के लिए सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया गया। मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर भी कॉलोनी के संपूर्ण विकास की मांग की गई। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद उसका निराकरण किस स्तर पर अटका हुआ है और जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का कितना आकलन किया?छतौना ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाली इस कॉलोनी की भौगोलिक स्थिति भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होनी चाहिए। बिलासपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर और हाईकोर्ट से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद यदि यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, तो यह केवल एक कॉलोनी की समस्या नहीं, बल्कि शहरी सीमा से लगे ग्रामीण एवं आवासीय क्षेत्रों के विकास की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर प्रश्न है।विकास के वादे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतरऊर्जा विहार कॉलोनी की मौजूदा तस्वीर उन तमाम विकास दावों के सामने एक आईना बनकर खड़ी है, जिनमें सड़क, नाली, जल निकासी और बेहतर आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने की बातें की जाती हैं। सवाल यह नहीं है कि विकास का वादा किसने किया था, बल्कि सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में लोग अपने घर बना चुके हैं या जमीन खरीदकर भविष्य की योजना बना रहे हैं, वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?यदि कॉलोनी का विकास ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला प्रशासन अथवा किसी अन्य संबंधित एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। केवल बारिश के समय मिट्टी डालकर या अस्थायी मरम्मत कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सड़क का समुचित निर्माण, नाली और जल निकासी की व्यवस्था तथा कॉलोनी के समग्र विकास की ठोस योजना आवश्यक है।हाईकोर्ट के आसपास का क्षेत्र फिर भी उपेक्षित क्यों?ऊर्जा विहार कॉलोनी की बदहाली का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से इतनी नजदीक और बिलासपुर जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है, तो यहां की मूलभूत समस्याएं लंबे समय से क्यों बनी हुई हैं? क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी मौके का निरीक्षण किया? यदि किया तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई? सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर क्या रिपोर्ट बनी और उसका पालन किस स्तर तक हुआ?इन सवालों का जवाब स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।अब केवल आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिएऊर्जा विहार कॉलोनी के रहवासियों की मांग को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इसे मूलभूत नागरिक सुविधा के सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए। सड़क किसी भी बस्ती की पहली पहचान होती है। जब सड़क ही बारिश में तालाब और कीचड़ में बदल जाए तो विकास की तस्वीर अधूरी ही मानी जाएगी।अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, वास्तविक स्थिति का पंचनामा तैयार करें और सड़क एवं जल निकासी के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाएं। साथ ही, प्लॉट बेचते समय विकास संबंधी वादे किए जाने के आरोपों की भी आवश्यकता पड़ने पर जांच हो, ताकि जमीन खरीदने वाले लोगों के हितों की रक्षा की जा सके।ऊर्जा विहार कॉलोनी की यह तस्वीर केवल एक खराब सड़क की तस्वीर नहीं है। यह उस व्यवस्था से सवाल है, जहां शिकायतें दर्ज होती हैं, ज्ञापन सौंपे जाते हैं, आश्वासन मिलते हैं—लेकिन बारिश आते ही विकास के दावों की असली तस्वीर कीचड़ भरी सड़क पर दिखाई देने लगती है।

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