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संलग्नीकरण पर रोक, फिर भी 11 कर्मचारी कलेक्टर कार्यालय अटैच! नाम सहित पूरा मामला.. कलेक्टर के आदेश पर उठे सवाल—शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप, स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों से कर्मचारियों को हटाकर कलेक्टर कार्यालय में किया गया संलग्न।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संलग्नीकरण व्यवस्था पर रोक लगाए जाने के बावजूद मुंगेली कलेक्टर कार्यालय से जारी एक आदेश ने प्रशासनिक और शिक्षा विभागीय गलियारों में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला कार्यालय में कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए 11 कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थलों से हटाकर आगामी आदेश तक कलेक्टर कार्यालय मुंगेली में कार्य करने के लिए आदेशित किया गया है।कार्यालय कलेक्टर, वित्त शाखा, जिला-मुंगेली द्वारा क्रमांक 5886/स्थापना/वित्त-2/2026, दिनांक 24 अगस्त 2026 को जारी आदेश में विभिन्न स्कूलों और शिक्षा विभागीय कार्यालयों के कर्मचारियों को जिला कार्यालय में कार्य करने के लिए भेजा गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन स्तर पर संलग्नीकरण पर रोक है, तब “कर्मचारियों की कमी” के आधार पर कर्मचारियों को एक विभाग से दूसरे कार्यालय में आगामी आदेश तक कैसे लगाया जा सकता है?इन 11 कर्मचारियों को कलेक्टर कार्यालय में लगाया गयाआदेश के अनुसार निम्न कर्मचारियों को जिला कार्यालय मुंगेली में कार्य करने हेतु आदेशित किया गया है— दुलारी ध्रुव, सहायक ग्रेड-02 — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुछेली।मनीष प्रसाद बजारे, सहायक ग्रेड-03 — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दाबो।रवि कुमार पाण्डेय, सहायक ग्रेड-03 — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लंगरा। ऐश्वर्य तिवारी, सहायक ग्रेड-03 — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चकरभठ्ठा।दीपक गुप्ता, सहायक ग्रेड-03 — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, फास्टरपुर। पंकज कुमार लहरे, सहायक ग्रेड-03 — बी.आर. साव बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मुंगेली।छत्रपाल साहू, सहायक ग्रेड-03 — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पडरभठ्ठा। योगेश डहरिया, सहायक ग्रेड-03 — स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लोरमी।संतोष कुमार साहू, डाटा एंट्री ऑपरेटर — कार्यालय समग्र शिक्षा, मुंगेली।विवेक बरेहा, भृत्य — शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, धरमपुरा।लोमश निषाद, भृत्य — कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, मुंगेली।इन सभी कर्मचारियों को आदेश के अनुसार कलेक्टर कार्यालय मुंगेली में आधार बेस अथवा VSK APP के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।सवाल—संलग्नीकरण नहीं तो फिर क्या है यह व्यवस्था?आदेश में कर्मचारियों को उनके मूल कार्यालयों से हटाकर “आगामी आदेश पर्यन्त” जिला कार्यालय में कार्य करने के लिए कहा गया है। यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर इस व्यवस्था को क्या कहा जाए?यदि कर्मचारियों को मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर दूसरे कार्यालय में अनिश्चित अवधि तक कार्य कराया जा रहा है तो यह व्यवस्था संलग्नीकरण की श्रेणी में आती है या नहीं? और यदि यह संलग्नीकरण नहीं है, तो इसका प्रशासनिक स्वरूप और कानूनी आधार क्या है?स्कूलों से कर्मचारी हटे, वहां काम कौन करेगा?इस आदेश का सीधा असर उन शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों पर भी पड़ सकता है, जहां ये कर्मचारी मूल रूप से पदस्थ हैं। सहायक ग्रेड-02, सहायक ग्रेड-03 और भृत्य जैसे कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद संबंधित स्कूलों और कार्यालयों में कार्यालयीन कार्यों की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?जिन संस्थाओं से कर्मचारियों को हटाया गया है, क्या वहां वास्तव में कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं थी? यदि जिला कार्यालय में कर्मचारियों की कमी है तो शासन से रिक्त पदों पर नियमित पदस्थापना की मांग क्यों नहीं की गई?मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी गई प्रतिलिपिमामले का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि आदेश की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, आयुक्त बिलासपुर संभाग और जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन स्तर पर इस आदेश को संलग्नीकरण नीति के अनुरूप माना जाता है अथवा नहीं।बड़ा सवाल—नियम सबके लिए या जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था?मुंगेली कलेक्टर का यह आदेश अब केवल 11 कर्मचारियों की कार्यव्यवस्था का मामला नहीं है। सवाल यह है कि संलग्नीकरण पर रोक के बावजूद कर्मचारियों को उनके मूल कार्यालयों और स्कूलों से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में आगामी आदेश तक कार्य कराने का अधिकार किस नियम के तहत दिया गया है?यदि शासन के नियमों में संलग्नीकरण प्रतिबंधित है, तो मुंगेली में 11 कर्मचारियों की यह व्यवस्था किस श्रेणी में आएगी?अब सामान्य प्रशासन विभाग और राज्य शासन को इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि सरकारी नियम वास्तव में सबके लिए समान हैं या फिर अधिकारियों की जरूरत के अनुसार उनकी अलग-अलग व्याख्या की जा सकती है।

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