
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2026 के तहत कला योग उत्सव का आयोजन गुरुवार, 06 अगस्त को ग़ालिब सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाना व योग के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम का प्रारंभ कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रदर्शनकारी कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश भारती ने कार्यक्रम का संचालन किया। प्रारंभ में सहायक प्रोफेसर डॉ. तेजश्वी एच.आर. और उनकी टीम ने मृदुल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत किया। उन्होंने दस रागों यथा भैरव से भैरवी तक की प्रस्तुति दी तो पूरा वातावरण एक अलौकिक शक्ति और ऊर्जा से भर गया, जिसमें उन्होंने जागो मोहन प्यारे, इतनी शक्ति हमें दे न दाता जैसे गीत गाये। उनके साथ तबले पर जीवन बांगडे ने तथा गायन में विद्यार्थी विजय महेश गौरी, प्रांजलि गायकवाड, रिद्धि लेकुरवाळे ने सहयोग किया।प्रदर्शनकारी कला विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. विधु खरे दास के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों द्वारा ‘योग प्रवाह’ विषय पर लघु नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक का लेखन एवं निर्देशन प्रदर्शनकारी कला विभाग के शोधार्थी उत्कर्ष उपेन्द्र सहस्त्रबुद्धे ने किया। नाटक के सूत्रधार मनीष कुमार थे। नाटक में जनार्दन दीक्षित ने आदियोगी शिव का, अंकिता कुशवाहा ने माता पार्वती का, कार्तिक बनवारी ने ऋषि पतंजलि का एवं विशाल परिहार, रमज़ान, अमित कुमार पटेल, रवि राज ने ऋषि एवं शिष्य के किरदार में भगवान शिव और पार्वती के वार्तालाप से योग की महत्ता को दर्शाया।योग नृत्य की प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने योग के विभिन्न आसन-मुद्राओं को प्रस्तुत किया। नृत्य में कपिल बहादुरे, संघमित्रा पंत, संगम कुमारी, सलोनी स्वाती कुमारी, शिया, षडानन दुआन, उमाकांत जेना ने सहभागिता की।अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि भारतीय कलाएँ रंग, राग एवं रसों की संयुक्त कलात्मक अभिव्यक्ति है। इस महोत्सव ने भारतीय ज्ञान परंपरा के स्वरूप और निरंतरता की अभिव्यक्तियों के साथ साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्विषयक संबंधों को पुष्ठ किया। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। इस अवसर पर अधिष्ठाता, अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।




