
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
विदर्भ साहित्य संघ, वर्धा शाखा द्वारा आयोजित साहित्य रसिक सम्मेलन में वरिष्ठ कवि-गीतकार एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र कोठेकर ने कहा कि समाज में बढ़ती विचार-शून्यता चिंता का विषय है और इसे दूर करने का महत्वपूर्ण कार्य साहित्य तथा साहित्यिक आंदोलनों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विचारहीनता समाज के लिए घातक है।कार्यक्रम की अध्यक्षता विदर्भ साहित्य संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप दाते ने की। प्रमुख अतिथि के रूप में सुविख्यात कवि एवं साहित्यकार श्याम माधव धोंड तथा डॉ. गजानन कोटेवार उपस्थित थे। डॉ. उपेन्द्र कोठेकर ने कहा कि नई पीढ़ी तकनीकी माध्यमों से अपनी अभिव्यक्ति कर रही है, इसलिए समयानुकूल साहित्य सृजन और साहित्यिक गतिविधियों की आवश्यकता है।श्याम माधव धोंड ने युवाओं को अवसर देने पर बल दिया, जबकि डॉ. गजानन कोटेवार ने सशक्त समाज निर्माण के लिए पुस्तकालय व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई। अध्यक्षीय संबोधन में प्रदीप दाते ने वर्धा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए साहित्यिक संस्थाओं को समाज और शासन से सहयोग मिलने की अपेक्षा व्यक्त की।कार्यक्रम का प्रास्ताविक विदर्भ साहित्य संघ, वर्धा शाखा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मुंढे ने किया। इस अवसर पर अतिथियों का सम्मान किया गया तथा काव्य पाठ की प्रस्तुतियां भी हुईं। सम्मेलन में जिले भर के साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



