
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी


छत्तीसगढ़ शासन के सबसे बड़े प्रशासनिक केंद्र महानदी भवन (मंत्रालय) में कार्यसंस्कृति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी दो अलग-अलग आदेशों में हाल ही में पदोन्नत किए गए दो कर्मचारियों को उनके स्वयं के अनुरोध पर पुनः उनके पुराने चतुर्थ श्रेणी पदों पर प्रत्यावर्तित (Reversion at Own Request) कर दिया गया।
इन आदेशों के सामने आने के बाद मंत्रालय के भीतर के माहौल, कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
विभागीय आदेश के अनुसार, चन्द्रकिशोर बघेल, जिन्हें भृत्य से कनिष्ठ सचिवालय सहायक बनाया गया था, तथा नेमन कुमार साहू, जिन्हें दफ्तरी से कनिष्ठ सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नत किया गया था, दोनों ने व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कारणों का उल्लेख करते हुए स्वयं ही पुराने पद पर लौटने का अनुरोध किया। शासन ने उनके आवेदन स्वीकार करते हुए तत्काल प्रभाव से प्रत्यावर्तन के आदेश जारी कर दिए।
हालांकि सरकारी आदेशों में प्रत्यावर्तन का कारण “व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कारण” बताया गया है, लेकिन मंत्रालय के कर्मचारी वर्ग में इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। कर्मचारी संगठनों और मंत्रालय के भीतर के कुछ सूत्रों का दावा है कि पिछले कुछ समय से कार्यस्थल का वातावरण तनावपूर्ण बना हुआ है।
कर्मचारियों का आरोप है कि ई-ऑफिस, बायोमेट्रिक उपस्थिति और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन के दौरान कई बार व्यवहारिक कठिनाइयों की अनदेखी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बन रहा है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि पदोन्नति के बाद कर्मचारी स्वयं पुराने पद पर लौटना बेहतर समझने लगें, तो यह केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि कार्यस्थल की परिस्थितियों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिन पदों को कर्मचारी वर्षों की सेवा और विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के बाद प्राप्त करते हैं, उन्हें कुछ ही समय में छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा?
मंत्रालय के भीतर यह चर्चा भी है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन प्रभावशाली अधिकारियों पर इनका समान रूप से पालन होता दिखाई नहीं दे रहा। यदि ऐसा है तो इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इधर, मंत्रालय में कर्मचारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हाल ही में मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों और डिप्टी कलेक्टरों को कर्मचारियों एवं आम नागरिकों के साथ विनम्र और शालीन व्यवहार करने की सलाह दी थी। इसे मंत्रालय के भीतर बढ़ रही असंतोष की शिकायतों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी मंत्रालय में कर्मचारी पदोन्नति को अवसर के बजाय बोझ समझने लगें, तो यह केवल एक विभाग की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक संस्कृति पर पुनर्विचार का विषय है।
सरकार के लिए यह आवश्यक होगा कि वह इन घटनाओं के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष समीक्षा कराए, ताकि भविष्य में कर्मचारी सम्मानजनक वातावरण में कार्य कर सकें और प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास बना रहे।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या यह केवल दो कर्मचारियों का व्यक्तिगत निर्णय है, या फिर मंत्रालय के भीतर पनप रहे असंतोष की एक गंभीर चेतावनी? इसका उत्तर शासन की आगामी कार्यवाही और मंत्रालय के माहौल में आने वाले बदलाव तय करेंगे।




