
विकास नंद/ सर्वव्यापी
आमजन की शिकवा-शिकायतों को लेकर छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार गंभीर नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न विभागों के कामकाज की लगातार समीक्षा कर अधिकारियों को समय-सीमा में समस्याओं के निराकरण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दे रहे हैं। सड़क, पेयजल, बिजली, आवास, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, ग्रामीण विकास और राजस्व जैसे जनसरोकार से जुड़े विषयों पर सरकार की निगरानी बढ़ी है।इसके बावजूद कई मामलों में अपेक्षित बदलाव जमीन पर दिखाई नहीं देने से अब यह सवाल उठने लगा है कि कड़े निर्देशों के बाद भी जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
समीक्षा बैठकों में सख्ती, जमीन पर धीमी रफ्तार
सरकार की समीक्षा बैठकों में आमजन की शिकायतों और विभागीय लापरवाही को गंभीरता से लेने की बात लगातार सामने आ रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और नागरिकों की समस्याओं का समय-सीमा में निराकरण हो।लेकिन दूसरी ओर कई क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत, पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं, आवास, शिक्षा, राजस्व प्रकरणों और ग्रामीण विकास कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। इससे शासन के निर्देशों और उनके जमीनी क्रियान्वयन के बीच अंतर को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कड़े निर्देशों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी विभाग में लगातार लापरवाही, अनियमितता या कार्यों में देरी सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? केवल बैठक, समीक्षा और निर्देशों तक सीमित कार्रवाई से व्यवस्था में स्थायी सुधार कितना संभव है, यह भी बड़ा सवाल है।जनता का मानना है कि जहां लापरवाही प्रमाणित हो, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। इससे न केवल संबंधित विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि सरकारी कार्यों में लापरवाही को किसी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
डबल इंजन सरकार से बढ़ी उम्मीदें
प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद आम जनता की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। लोगों को विकास कार्यों में तेजी, बेहतर प्रशासन और शिकायतों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा है। सरकार की ओर से योजनाओं और विकास कार्यों की मॉनिटरिंग किए जाने से उम्मीद जगी है कि प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक जवाबदेह बनेगी।अब वास्तविक चुनौती यह है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों और राजधानी में होने वाली समीक्षा बैठकों का असर सरकारी दफ्तरों से निकलकर गांव, कस्बों और शहरों की सड़कों तक साफ दिखाई दे।
शिकायत से समाधान और समाधान से जवाबदेही जरूरी
जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुनना सरकार की सकारात्मक पहल है, लेकिन शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान और फिर जिम्मेदारी तय होने तक की पूरी प्रक्रिया प्रभावी होना जरूरी है।यदि बार-बार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे शासन की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं, लापरवाही के मामलों में समयबद्ध जांच और कार्रवाई होती है तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत होगा।
अब जनता की नजर केवल मुख्यमंत्री के निर्देशों पर नहीं, बल्कि उन निर्देशों के बाद होने वाली कार्रवाई पर भी है। सवाल सीधा है—समीक्षा और सख्त निर्देशों के बाद जिम्मेदार बड़े अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?




