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शासन से नहीं, हाईकोर्ट से मिला न्याय: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋचा शर्मा को राहत…पदस्थापना में भेदभाव के आरोपों को ‘सर्वव्यापी’ ने उठाया था प्रमुखता से, शासन ने नहीं सुनी तो न्यायालय की शरण में जाना पड़ा।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

प्रदेश में प्रशासनिक पदस्थापनाओं को लेकर पारदर्शिता और समानता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋचा शर्मा को अपनी पदस्थापना को लेकर अंततः शासन से नहीं, बल्कि उच्च न्यायालय से राहत मिली। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस विषय को ‘सर्वव्यापी’ ने पहले ही प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए पदस्थापना प्रक्रिया में कथित भेदभाव और असमान व्यवहार का मुद्दा उठाया था।’सर्वव्यापी’ ने अपने समाचार में बताया था कि एक महिला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने पदस्थापना में अपनाए गए कथित भेदभावपूर्ण रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका सिंह बारिक को विस्तृत ज्ञापन सौंपा था।

ज्ञापन में निष्पक्ष एवं न्यायसंगत पदस्थापना की मांग की गई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संबंधित अधिकारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋचा शर्मा को राहत प्रदान की। इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में पदस्थापना नीति और उसके क्रियान्वयन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

गौरतलब है कि ‘सर्वव्यापी’ ने अपने समाचार में यह प्रश्न भी उठाया था कि यदि पदस्थापना की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित है, तो फिर एक वरिष्ठ महिला अधिकारी को अपनी बात मनवाने के लिए न्यायालय की शरण लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी। शासन स्तर पर समय रहते शिकायत का निराकरण किया जाता तो शायद न्यायालय तक जाने की नौबत नहीं आती।

उच्च न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि किसी अधिकारी के साथ प्रशासनिक प्रक्रिया में न्यायसंगत व्यवहार नहीं होता है, तो न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप कर सकती है।

इस घटनाक्रम ने शासन की पदस्थापना प्रक्रिया, शिकायत निवारण तंत्र तथा प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

अब प्रशासनिक एवं पुलिस महकमे में इस बात की चर्चा है कि क्या शासन भविष्य में पदस्थापनाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भेदभावरहित बनाने के लिए अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगा, ताकि किसी अधिकारी को न्याय के लिए अदालत की शरण न लेनी पड़े।

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