
नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(सर्वव्यापी)

जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत पूटा अंतर्गत वनांचल बसाहट सांचरखुटरा में रहने वाले विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति के बच्चों की शिक्षा लंबे समय से भौगोलिक कठिनाइयों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से प्रभावित हो रही थी। मामला प्रशासन के संज्ञान में आते ही कलेक्टर विजय दयाराम के. ने इसे गंभीर मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया और बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।प्रशासन की त्वरित पहल के तहत शिक्षा विभाग ने शासकीय प्राथमिक शाला पूटा के सहायक शिक्षक चंद्रभान सिंह उइके और रणवीर सिंह बैगा की रोस्टर के आधार पर ड्यूटी सांचरखुटरा में लगाई है। अब दोनों शिक्षक अपनी मूल शाला में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद प्रतिदिन बारी-बारी से सांचरखुटरा पहुंचकर सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाएंगे।इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बरसात के मौसम में बच्चों को दुर्गम, फिसलनभरे और जोखिमपूर्ण रास्तों से विद्यालय तक नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनकी पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकेगी और विद्यालय से दूरी के कारण शिक्षा छूटने का खतरा भी कम होगा।केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण को भी प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की है। शासकीय प्राथमिक शाला पूटा से आवश्यक खाद्य सामग्री सांचरखुटरा भेजी जाएगी, जहां आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से बच्चों के लिए प्रतिदिन गर्म और पौष्टिक भोजन तैयार कर उपलब्ध कराया जाएगा।कलेक्टर विजय दयाराम के. ने कहा कि जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भौगोलिक कठिनाइयों या संसाधनों की कमी किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनने दी जाएगी और प्रशासन इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।*जमीनी पड़ताल*सांचरखुटरा जैसे दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए बरसात के दौरान विद्यालय पहुंचना वर्षों से बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर शिक्षण और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था करना न केवल शिक्षा के अधिकार को मजबूत करता है, बल्कि विद्यालय छोड़ने की समस्या को कम करने और विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर सभी की नजर रहेगी।



