तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में स्थानांतरण व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अब मंत्रालय की चौखट तक पहुंच गए हैं। मंत्रालय में पदस्थ एक उप सचिव की बेटी के स्थानांतरण प्रकरण ने विभागीय व्यवस्था और कथित बिचौलिया तंत्र को लेकर नई बहस छेड़ दी है।विभागीय सूत्रों के अनुसार उप सचिव की बेटी के स्थानांतरण प्रकरण पर विभागीय स्तर से पहल की गई थी। बताया जा रहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह की ओर से प्रकरण पर मार्किंग भी की गई, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों द्वारा कथित रूप से शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश का हवाला दिए जाने के बाद मामला और पेचीदा हो गया। अपनी समस्या लेकर उप सचिव जब मंत्री कार्यालय पहुंचीं तो उन्हें एक अधिकारी से मिलने के लिए कहा गया।आरोप है कि इस दौरान अधिकारी द्वारा ट्राइबल क्षेत्र में पदस्थ कर्मचारी के जिला स्तर स्थानांतरण के लिए तीन लाख रुपए की मांग की गई। हालांकि इस पूरे मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यदि मंत्रालय में पदस्थ अधिकारी के परिवार को स्थानांतरण के लिए इतनी जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ हजारों कर्मचारियों की स्थिति क्या होगी, यह बड़ा सवाल है।तबादला नीति या तबादला बाजार?सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावे के बीच उठे इन आरोपों की जांच होगी या फिर फाइलों में ही दब जाएगा मामला?अब निगाहें शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




