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बरसों से खसरा-खतौनी संभाली, अब अपनी किस्मत का हिसाब मांग रहे पटवारी..!

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के पटवारी प्रोमोशन और वेतन विसंगति को लेकर आक्रोशित है। उनका कहना कहना है कि प्रमोशन के लिए कोई नीति नहीं है। वेतन में भी भारी विसंगति है। ऐसे में पटवारियों को भारी आर्थिक हानि तो हो ही रही है जिस पर उनकी भर्ती होती है उसी पद पर वे सेवानिवृत्त भी हो जाते है। यही कारण है कि राजस्व पटवारी संघ ने मुख्य सचिव के नाम पर ज्ञापन सौंपा है।राजस्व पटवारी संघ ने ज्ञापन सौंपने हुए कहा है कि पटवारियों की पदोन्नति एवं वेतन निर्धारण में त्रुटि के कारण पटवारियों में भारी असंतोष है। पटवारियों की पदोन्नति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है। जिसके कारण कई पटवारी, पटवारी के पद पर नियुक्त होकर पटवारी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं। यह स्थिति पटवारियों के मनोबल एवं कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए पटवारियों की पदोन्नति के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाए। राजस्व निरीक्षक के पदों पर सीधी भर्ती पूर्णतः बंद की जाए। राजस्व निरीक्षक के समस्त रिक्त पद केवल पटवारियों से पदोन्नति के माध्यम से भरे जाएं। RI के 50% पद वरिष्ठता के आधार पर और 50% पद विभागीय परीक्षा के आधार पर किया जाए। लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए। इसके अलावा वेतन विसंगति को तत्काल दूर किया जाए।प्रदेश के विभिन्न भर्ती वैचों के पटवारियों के वेतन निर्धारण में गंभीर विसंगतियां विद्यमान हैं। उदाहरण स्वरूप पटवारी भर्ती वर्ष 2010 बैच में 01.07.2025 की स्थिति में ग्रेड पे ₹2200 से ₹2400 होने पर मूल वेतन ₹36,200 निर्धारित है। जबकि ग्रेड पे ₹2200 से ₹2400 से ₹2800 होने पर मूल वेतन ₹35,300 निर्धारित किया गया है। यह वेतन संरचना के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। ग्रेड पे में वृ‌द्धि होने पर मूल वेतन कम होना न्यायोचित नहीं है। ऐसी स्थिति में मूल वेतन ₹36,400 होना चाहिए था। इसी प्रकार की वेतन विसंगतियां से पटवारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। कोष एवं लेखा सत्यापन में कठिनाइयां होती है। अनावश्यक रिकवरी की संभावना बनी रहती है। इसके कारण भविष्य की वेतन वृद्धि, पदोन्नति, पेंशन एवं अन्य सेवा लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसकी पटवारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए। राजस्व निरीक्षक के रिक्त पदों पर केवल पटवारियों से पदोन्नति की व्यवस्था लागू की जाए। वेतन विसंगति का परीक्षण कर उसका शीघ्र एवं न्यायोचित निराकरण किया जाए, ताकि प्रदेश के समस्त पटवारियों को आर्थिक एवं सेवा संबंधी न्याय प्राप्त हो सके। राजस्व पटवारी संघ ने अपनी मांग शासन के समक्ष रखा है लेकिन आंदोलन करने की कोई चेतावनी नहीं दी है।

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