
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला बिलासपुर ने ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों का वेतन निर्धारित किए जाने संबंधी आदेश का कड़ा विरोध करते हुए इसे शिक्षक विरोधी, अव्यावहारिक एवं अन्यायपूर्ण बताया है। फेडरेशन के जिला अध्यक्ष सुनील पांडेय का कहना है कि यदि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होने के आधार पर ही वेतन भुगतान किया जाएगा, तो इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव दूरस्थ, वनांचल एवं नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों पर पड़ेगा, जहां इंटरनेट एवं तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता आज भी गंभीर समस्या बनी हुई है।
फेडरेशन के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार पाण्डेय ने कहा कि किसी शिक्षक की उपस्थिति एवं कार्यनिष्ठा का मूल्यांकन केवल मोबाइल एप या तकनीकी माध्यम से नहीं किया जा सकता। अनेक बार नेटवर्क बाधित होने, सर्वर डाउन रहने, एप की तकनीकी खामी अथवा अन्य डिजिटल समस्याओं के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जबकि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों का वेतन रोकना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके मनोबल को भी गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
फेडरेशन ने शासन एवं स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में आने वाली सभी तकनीकी समस्याओं का पहले स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। केवल तकनीकी त्रुटि के आधार पर किसी भी शिक्षक का वेतन रोकने की व्यवस्था समाप्त की जाए तथा यदि किसी प्रकार की विसंगति सामने आती है तो उसका सत्यापन संस्था प्रमुख एवं संबंधित सक्षम अधिकारी के माध्यम से किया जाए। साथ ही शिक्षकों के हितों को प्रभावित करने वाले इस आदेश पर तत्काल पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन किया जाए।
फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक समाज सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य करता रहा है। इसलिए दंडात्मक एवं अव्यावहारिक आदेशों के माध्यम से शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बनाना उचित नहीं है।
यदि शासन द्वारा इस आदेश में शीघ्र आवश्यक संशोधन नहीं किया गया, तो सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन एवं विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होगा।




