
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
नगरीय निकाय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री अरुण साव के पास यदि बिलासपुर शहर की बदहाल सड़कों, जर्जर मार्गों और नागरिकों की लगातार बढ़ती परेशानियों को देखने का समय नहीं है, तो विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा जी से विनम्र निवेदन है कि वे स्वयं बिलासपुर शहर की सड़कों की स्थिति देखने के लिए समय निकालें।बिलासपुर आपके लिए कोई अनजान शहर नहीं है। आप इस शहर में नगर निगम आयुक्त, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और संभाग आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसलिए बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्था और शहर की मूलभूत समस्याओं से आप भली-भांति परिचित हैं।आज शहर की अनेक सड़कें बदहाल हैं। कहीं गड्ढे हैं, कहीं सड़कें उखड़ी हुई हैं, कहीं निर्माण और मरम्मत के नाम पर लंबे समय से काम अधूरा पड़ा है। बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। आम नागरिक, दोपहिया वाहन चालक, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर प्रतिदिन इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।सवाल यह है कि जब सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी नागरिकों को बार-बार गुहार लगानी पड़े, तब नगरीय प्रशासन की जवाबदेही आखिर किसकी है? शिकायतों और बैठकों से आगे बढ़कर जमीन पर काम कब दिखाई देगा?बिलासपुर ने आपको प्रशासनिक अधिकारी के रूप में करीब से देखा है। इसलिए आज शहर के नागरिकों को उम्मीद है कि विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में आप एक बार फिर उसी संवेदनशीलता के साथ बिलासपुर की सड़कों का निरीक्षण करेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे।यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ आरोप नहीं, बल्कि बिलासपुर के नागरिकों की मूलभूत सुविधा और सम्मान से जुड़ा सवाल है।प्रमुख सचिव महोदय, एक बार बिना औपचारिकता के बिलासपुर की सड़कों पर निकलकर देखिए—कागजों में शहर की स्थिति कुछ और होगी, लेकिन जमीन पर तस्वीर आपको बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर करेगी।


