
नूर मोहम्मद, जिला ब्यूरो चीफ, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)

जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 1 से 15 सितंबर तक आयोजित किए जा रहे साक्षरता पखवाड़े ने अब जनअभियान का रूप लेना शुरू कर दिया है। 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे वयस्क, जो स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए हैं, उन्हें साक्षर बनाने के साथ-साथ डिजिटल, वित्तीय और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से इन 15 दिनों में गांव, पंचायत, विद्यालय और संकुल स्तर पर अनेक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।इस पूरे अभियान की खास बात यह है कि जिला कलेक्टर विजय दयाराम के. के निर्देशन और जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी के मार्गदर्शन में साक्षरता अभियान को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय संकुल और जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विभाग द्वारा जारी विस्तृत समय-सारणी के अनुसार गौरेला विकासखंड के सभी संकुलों में निर्धारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
आलोक शुक्ला की जमीनी सक्रियता बनी अभियान की ताकत
गौरेला विकासखंड में इस अभियान को प्रभावी रूप से गति देने में नोडल अधिकारी आलोक शुक्ला की सक्रिय और जमीनी भूमिका विशेष रूप से सामने आ रही है। संकुल स्तर पर समन्वय, विद्यालयों से सतत संपर्क, गतिविधियों की निगरानी तथा शिक्षकों और स्वयंसेवी शिक्षकों को अभियान से जोड़ने की दिशा में उनके प्रयासों से साक्षरता पखवाड़े की गतिविधियां व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही हैं।1 सितंबर को ही गौरेला विकासखंड के सभी संकुलों में ‘उल्लास शपथ’ का आयोजन कर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। विद्यालयों एवं संबंधित संस्थानों में साक्षरता का संकल्प लिया गया और समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया गया।आलोक शुक्ला की विशेषता यह है कि वे अभियान को केवल बैठकों और निर्देशों तक सीमित रखने के बजाय मैदानी स्तर पर गतिविधियों के क्रियान्वयन और संकुलों के साथ समन्वय पर जोर दे रहे हैं। यही वजह है कि गौरेला विकासखंड में साक्षरता पखवाड़े की शुरुआत सभी संकुलों में एक साथ प्रभावी ढंग से हो सकी है।
कलेक्टर विजय दयाराम के. की सोच-साक्षरता बने जनभागीदारी का अभियान
जिला कलेक्टर विजय दयाराम के. के निर्देशन में जिले में साक्षरता अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य केवल असाक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए अधिकारों, जिम्मेदारियों, डिजिटल साधनों और आर्थिक गतिविधियों के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना है।कलेक्टर के निर्देशन में साक्षरता पखवाड़े के दौरान जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
डीईओ रजनीश तिवारी के मार्गदर्शन में शिक्षा तंत्र की सक्रिय भागीदारी
जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी के मार्गदर्शन में विद्यालयों और शिक्षा विभाग से जुड़े अमले को साक्षरता अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जारी समय-सारणी के अनुसार 1 से 15 सितंबर तक अलग-अलग दिवसों पर सर्वेक्षण, पंजीयन, साक्षरता संगोष्ठी, रैली, प्रतियोगिताएं, पठन दिवस, महिला साक्षरता कार्यक्रम, डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण, उल्लास मेला और समापन समारोह जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।इससे अभियान का दायरा विद्यालय की चारदीवारी से निकलकर गांव, पंचायत, बाजार और समुदाय तक पहुंचने की उम्मीद है।
हर दिन अलग गतिविधि, हर गतिविधि का एक ही लक्ष्य-निरक्षरता पर प्रहार
साक्षरता पखवाड़े की समय-सारणी को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रत्येक दिन साक्षरता के अलग-अलग आयामों पर काम हो। शुरुआती दिनों में असाक्षरों एवं स्वयंसेवी शिक्षकों का सर्वेक्षण और पंजीयन होगा। इसके बाद विद्यालय स्तर पर संगोष्ठी, शिक्षक दिवस पर सम्मान, साक्षरता रैली, नुक्कड़ नाटक, लोकगीत और मानव श्रृंखला जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाई जाएगी।8 सितंबर अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम, जनप्रतिनिधियों की सहभागिता, साक्षरता मानव श्रृंखला और ।साक्षरता दीप जलाने जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।इसके बाद कहानी, कला और स्थानीय संस्कृति को साक्षरता का माध्यम बनाया जाएगा। महिला साक्षरता संगोष्ठी, रेडियो जिंगल एवं लघु फिल्म प्रदर्शन, डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी भी दी जाएगी। 13 सितंबर को उल्लास मेला, 14 सितंबर को हिंदी दिवस से जुड़ी प्रतियोगिताएं और 15 सितंबर को समापन एवं पुरस्कार वितरण के साथ पखवाड़े का समापन होगा।
संकुल से गांव तक-‘उल्लास’ को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी
गौरेला विकासखंड में सभी संकुलों के माध्यम से निर्धारित समय-सारणी के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इसके पीछे उद्देश्य स्पष्ट है-साक्षरता अभियान का लाभ केवल चुनिंदा स्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक गांव और प्रत्येक पात्र असाक्षर व्यक्ति तक पहुंचे।कलेक्टर विजय दयाराम के. का निर्देशन, डीईओ रजनीश तिवारी का मार्गदर्शन और संकुल स्तर पर नोडल अधिकारी आलोक शुक्ला की सक्रिय मैदानी भूमिका—इन तीन स्तरों के समन्वय से गौरेला में साक्षरता पखवाड़े को प्रभावी जनअभियान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
‘उल्लास’ अब सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बदलाव का संकल्प
साक्षरता का यह अभियान उन लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से दूर रह गए। पढ़ना-लिखना सीखने के साथ अपने अधिकारों को समझना, बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं का सुरक्षित उपयोग करना तथा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना ही उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की वास्तविक भावना है।गौरेला में 1 सितंबर को ली गई उल्लास शपथ इसी संकल्प की शुरुआत है-अब 15 सितंबर तक हर संकुल, हर गांव और हर समुदाय में साक्षरता की यह आवाज लगातार गूंजेगी।




