
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
प्रशासनिक सेवाओं में पद और जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ अधिकारियों के व्यवहार में बदलाव की चर्चाएं अक्सर होती रहती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के बारे में विभागीय कर्मचारियों और उनके साथ काम कर चुके अधिकारियों के बीच एक बात लंबे समय से चर्चा में रही है—पद बदलते गए, लेकिन उनका मानवीय और आत्मीय व्यवहार नहीं बदला।वर्तमान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर पदस्थ सोनमणि बोरा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति सहज और आत्मीय व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कार्य में गलती होने पर वे अनावश्यक रूप से डांटने-फटकारने के बजाय संबंधित कर्मचारी को सहज भाव से “बेटा” कहकर समझाते हैं। उनकी कार्यशैली में अनुशासन भी है और आत्मीयता भी।सोनमणि बोरा का यह व्यवहार केवल प्रमुख सचिव बनने के बाद का नहीं है। प्रशासनिक सेवा के अपने लंबे सफर में जब वे एसडीएम, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, कलेक्टर और संभाग आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, तब भी अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ उनका यही सहज और मानवीय व्यवहार देखा गया। उनके साथ अलग-अलग स्थानों और पदों पर काम कर चुके कर्मचारियों के बीच आज भी उनकी इसी कार्यशैली की चर्चा होती है।बताया जाता है कि सोनमणि बोरा कार्य में लापरवाही या गलती को नजरअंदाज नहीं करते, बल्कि गलती करने वाले कर्मचारी को पहले समझाते हैं कि उससे कहां चूक हुई और उसे कैसे सुधारा जा सकता है। उनकी कोशिश रहती है कि गलती की पुनरावृत्ति न हो, लेकिन समझाइश का तरीका ऐसा हो कि कर्मचारी अपमानित या भयभीत होने के बजाय अपनी जिम्मेदारी को और बेहतर ढंग से निभाए।विभागीय कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि प्रमुख सचिव का यह व्यवहार उनके भीतर एक अभिभावक और प्रशासक के संतुलन को दर्शाता है। किसी गंभीर विषय पर वे सख्ती भी बरतते हैं, लेकिन सामान्य प्रशासनिक गलतियों को लेकर उनके व्यवहार में संयम और संवेदनशीलता दिखाई देती है। यही कारण है कि कर्मचारी उन्हें केवल आदेश देने वाले वरिष्ठ अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि मार्गदर्शन करने वाले वरिष्ठ के रूप में भी देखते हैं।प्रशासनिक पदों पर काम करने के दौरान अधिकारी और अधीनस्थ के बीच अक्सर औपचारिक दूरी बनी रहती है। ऐसे माहौल में किसी वरिष्ठ अधिकारी का कर्मचारियों को नाम या “बेटा” कहकर संबोधित करते हुए सहज रूप से समझाना कर्मचारियों के लिए अलग अनुभव बन जाता है। कर्मचारियों का मानना है कि जब किसी बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाला अधिकारी संवाद के लिए सहज रहता है, तो अधीनस्थ भी अपनी समस्याओं और कार्य संबंधी चुनौतियों को बिना संकोच सामने रख पाते हैं।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में इन दिनों प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की इसी मानवीय कार्यशैली की चर्चा है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि उनके व्यवहार से यह संदेश मिलता है कि बड़ा पद पाने के बाद बड़ा बनने का अर्थ केवल अधिकारों का विस्तार नहीं, बल्कि अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों के प्रति मानवीयता और संवेदनशीलता बनाए रखना भी है।एसडीएम से लेकर प्रमुख सचिव तक के प्रशासनिक सफर में सोनमणि बोरा ने कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियां संभालीं, लेकिन उनके साथ काम करने वाले लोगों के अनुसार, पद और कार्यालय बदलते रहे, जिम्मेदारियां बढ़ती रहीं, लेकिन अधीनस्थों के प्रति उनका सहज और आत्मीय व्यवहार लगातार बना रहा। यही व्यवहार आज भी उन्हें प्रशासनिक गलियारों में एक अलग पहचान दिलाता है।वर्तमान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में उनके सामने विभाग की बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियां हैं, लेकिन कर्मचारियों के बीच सोनमणि बोरा की पहचान केवल एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की नहीं, बल्कि गलती पर फटकार के बजाय समझाइश देने वाले, अनुशासन के साथ आत्मीयता निभाने वाले और पद की गरिमा के साथ मानवीय रिश्तों को भी महत्व देने वाले अधिकारी के रूप में बनी हुई है।कहना गलत नहीं होगा कि प्रशासनिक सेवा में सोनमणि बोरा का सफर पदों की ऊंचाइयों तक जरूर पहुंचा है, लेकिन उनका व्यवहार आज भी उसी सहजता के साथ जमीन से जुड़ा हुआ है।




