
विकास नंद/ सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की मौजूदा स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की युगलपीठ ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में योजना की वर्तमान स्थिति सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने अब तक हुए कार्यों और योजना की प्रगति का विस्तृत ब्यौरा भी मांगा है।
केंद्र से बराबर राशि मिलने के बाद कितनी बढ़ी रफ्तार?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने बताया कि केंद्र सरकार ने योजना के कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य के हिस्से की बराबर राशि जारी कर दी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार से यह बताने को कहा कि राशि मिलने के बाद योजना के काम में कितनी वास्तविक प्रगति हुई है।अदालत के इस सवाल के बाद अब सरकार को केवल राशि जारी होने की जानकारी नहीं, बल्कि उसके बाद धरातल पर हुए काम और योजना की वर्तमान प्रगति का भी हिसाब देना होगा।
पुरानी जिलावार रिपोर्ट पर नहीं चलेगा काम
हाईकोर्ट ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव की ओर से 20 फरवरी 2025 को दाखिल शपथपत्र का भी अवलोकन किया। इसमें जल जीवन मिशन की जिलावार स्थिति का उल्लेख किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने अब पुरानी जिलावार रिपोर्ट के बजाय योजना की वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करने को कहा है।न्यायालय के निर्देश से यह स्पष्ट है कि अब योजना की पुरानी प्रगति रिपोर्ट के बजाय मौजूदा स्थिति और अब तक हुए काम का अद्यतन ब्यौरा महत्वपूर्ण होगा।
सरकार बदली, क्या बदला जल जीवन मिशन का हाल?
जल जीवन मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनहितकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण योजना मानी जाती है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार के कार्यकाल में भी योजना के क्रियान्वयन, खर्च और जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार बदलने के बाद भी यदि योजना की रफ्तार और जमीनी स्थिति को लेकर हाईकोर्ट को वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा मांगना पड़ रहा है, तो यह मौजूदा व्यवस्था के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है।विपक्ष और आलोचकों की ओर से पहले भी योजनाओं में राशि के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच या न्यायिक निष्कर्ष से ही हो सकती है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि केंद्र से राज्य के हिस्से की बराबर राशि उपलब्ध होने के बाद जल जीवन मिशन के काम वास्तव में कितनी गति से आगे बढ़े हैं और इसका लाभ कितने परिवारों तक पहुंचा है।
अगली सुनवाई में खुलेगा वर्तमान प्रगति का पिटार अगली सुनवाई में राज्य सरकार को जल जीवन मिशन की वर्तमान स्थिति, अब तक हुए कार्यों तथा केंद्र से मिली राशि के बाद हुई प्रगति का विस्तृत विवरण सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
अब देखना होगा कि ट्रिपल इंजन सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन की रफ्तार धरातल पर कितनी बदली है और कागजों की प्रगति के मुकाबले गांवों में नल से जल की वास्तविक स्थिति क्या है।


