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12वीं+DCA वालों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे बंद?भर्ती नियमों में बदलाव से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में, पुराने नियमों से पढ़ाई करने वालों को कौन देगा जवाब?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती के बदलते योग्यता मानकों ने हजारों ऐसे युवाओं की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने 12वीं के बाद एक वर्षीय DCA (Diploma in Computer Application) पाठ्यक्रम पूरा कर सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की थी। सवाल अब केवल एक डिप्लोमा की मान्यता का नहीं, बल्कि उन युवाओं के भविष्य का है जिन्होंने शासन अथवा मान्यता प्राप्त संस्थानों की व्यवस्था पर भरोसा करते हुए अपनी पढ़ाई और आर्थिक संसाधन लगाए। यदि भर्ती नियम बदलने के बाद वही योग्यता रोजगार के अवसरों में उपयोगी नहीं रह जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?जिस योग्यता के भरोसे तैयारी की, वही अब सवालों के घेरे मेंसरकारी कार्यालयों में सहायक ग्रेड-3, डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित विभिन्न लिपिकीय और कंप्यूटर आधारित पदों के लिए लंबे समय से कंप्यूटर दक्षता को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। इसी उम्मीद में बड़ी संख्या में युवाओं ने 12वीं के बाद DCA जैसे कंप्यूटर पाठ्यक्रम किए। ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए यह रास्ता अपेक्षाकृत कम समय और कम खर्च में रोजगार की तैयारी का माध्यम रहा है।लेकिन भर्ती नियमों और विज्ञापनों में शैक्षणिक एवं तकनीकी अर्हताओं के बदलते स्वरूप ने इन अभ्यर्थियों के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। कहीं स्नातक की अनिवार्यता, कहीं विशिष्ट कंप्यूटर डिग्री अथवा PGDC जैसी अर्हताओं की शर्त और कहीं पद विशेष के लिए अलग तकनीकी योग्यता ने 12वीं+DCA अभ्यर्थियों को असमंजस में डाल दिया है।नियम बदले तो तैयारी कर रहे युवाओं को संक्रमणकाल क्यों नहीं?सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शासन को भर्ती की योग्यता बदलनी ही थी, तो क्या पुराने नियमों के आधार पर वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए कोई संक्रमणकालीन व्यवस्था बनाई गई?सरकारी भर्ती नियमों में बदलाव भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप हो सकता है, लेकिन अचानक बदले हुए मानकों का सबसे ज्यादा असर उन युवाओं पर पड़ता है जिन्होंने पहले से प्रचलित अर्हता के आधार पर अपना कैरियर तय किया था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियम बदलने की तारीख और युवाओं के भविष्य के बीच न्यायसंगत संतुलन कहां है?DCA मान्य है तो किस-किस नौकरी में?अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग अब स्पष्टता की है। यदि शासन और संबंधित विभागों के स्तर पर DCA को मान्यता प्राप्त कंप्यूटर योग्यता के रूप में स्वीकार किया जाता है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि 12वीं+DCA की योग्यता किन-किन शासकीय पदों के लिए मान्य है और किन पदों के लिए नहीं।अलग-अलग भर्ती विज्ञापनों में अलग-अलग तकनीकी अर्हताओं के कारण अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बन रही है। यही भ्रम भविष्य में विवाद, आपत्तियों और न्यायालयीन मामलों का कारण भी बन सकता है।मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता पर बड़ा सवालयहां एक और गंभीर नीतिगत सवाल सामने आता है। यदि कोई विद्यार्थी मान्य संस्थान से 12वीं के बाद DCA करता है और उसे कंप्यूटर संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त होता है, तो सरकारी भर्ती में उसकी योग्यता की उपयोगिता किस आधार पर तय होगी?क्या केवल स्नातक की डिग्री जोड़ दिए जाने से कंप्यूटर दक्षता स्वतः अधिक प्रमाणित हो जाती है? या फिर पद की वास्तविक कार्य-प्रकृति के आधार पर तकनीकी योग्यता तय की जानी चाहिए?यह बहस केवल DCA धारकों तक सीमित नहीं है। यह सरकार की पूरी भर्ती नीति, योग्यता निर्धारण और रोजगारोन्मुख शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न है।शिक्षा व्यवस्था और भर्ती नियमों में तालमेल जरूरीएक तरफ सरकार युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा और कौशल विकास के लिए प्रोत्साहित करती है, दूसरी तरफ यदि उन्हीं पाठ्यक्रमों की उपयोगिता सरकारी रोजगार में सीमित होती जाती है, तो युवाओं के बीच असमंजस पैदा होना स्वाभाविक है।ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और संबंधित भर्ती एजेंसियों को मिलकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-सा डिप्लोमा किस स्तर की सरकारी नौकरी के लिए स्वीकार्य है। इससे अभ्यर्थियों को पाठ्यक्रम चुनने से पहले ही अपने रोजगार के अवसरों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।एक अंतिम अवसर की मांग क्यों नहीं?12वीं+DCA अभ्यर्थियों की ओर से उठ रही प्रमुख मांग यह है कि यदि नए नियम लागू किए जा रहे हैं तो पुराने नियमों के आधार पर तैयारी कर चुके अभ्यर्थियों को कम से कम एक संक्रमणकालीन अवसर दिया जाए।सरकार चाहे तो वर्तमान अथवा निकट भविष्य की किसी भर्ती में पुराने नियमों के तहत पात्र अभ्यर्थियों को अंतिम अवसर देकर इसके बाद नए मानकों को पूर्ण रूप से लागू कर सकती है। इससे न तो नई व्यवस्था प्रभावित होगी और न ही वर्षों से तैयारी कर रहे युवाओं को अचानक रोजगार की दौड़ से बाहर होने का झटका लगेगा।क्या सरकार जारी करेगी स्पष्ट गाइडलाइन?अब निगाहें राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर हैं। जरूरत इस बात की है कि केवल भर्ती विज्ञापन जारी करने के बजाय योग्यता की समकक्षता को लेकर एक स्पष्ट और सार्वजनिक गाइडलाइन जारी की जाए।सवाल यह भी है कि यदि DCA को किसी पद के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, तो क्या उसके लिए वैकल्पिक रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं? क्या ऐसे पदों की पहचान की गई है जहां 12वीं+DCA अभ्यर्थियों की तकनीकी दक्षता सीधे उपयोगी हो सकती है?युवाओं का सवाल—नियम बदलना सरकार का अधिकार, लेकिन भविष्य का क्या?भर्ती नियमों में संशोधन शासन की नीतिगत प्रक्रिया का हिस्सा है। प्रशासन को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुसार योग्यता मानक तय करने का अधिकार है। लेकिन नीति की सफलता केवल नए नियम बनाने में नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी है कि उसका संक्रमण न्यायपूर्ण हो।आज 12वीं+DCA अभ्यर्थियों के सामने यही सवाल खड़ा है—उन्होंने जिस योग्यता को रोजगार की सीढ़ी समझकर हासिल किया था, क्या वह अब केवल प्रमाण-पत्र बनकर रह जाएगी?यदि DCA की उपयोगिता समाप्त हो रही है तो सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि ऐसा क्यों है। यदि इसकी उपयोगिता कायम है तो किन पदों पर है, यह भी सार्वजनिक करना होगा। और यदि नियमों में बदलाव अपरिहार्य है तो वर्षों से तैयारी कर रहे युवाओं के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था क्यों नहीं?सरकार के सामने अब चुनौती सिर्फ भर्ती नियम बदलने की नहीं, बल्कि उन युवाओं का भरोसा बनाए रखने की भी है, जिन्होंने इन्हीं नियमों और सरकारी मान्यता पर विश्वास करके अपना भविष्य तय किया है।

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