
विकास नंद/ सर्वव्यापी

राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।राज्यपाल ने मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक लेकर शैक्षणिक गुणवत्ता, सीटों के अनुपात में विद्यार्थियों की संख्या, रिक्त पदों की पूर्ति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन तथा नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में जहां भी व्यवस्थागत कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए और शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रिक्त पद जल्द भरें, स्थानीय प्रतिभाओं को मिले अवसर
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की जानकारी लेते हुए उन्हें शीघ्र भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमानुसार स्थानीय योग्य एवं प्रतिभाशाली लोगों को प्राथमिकता देने के प्रयास किए जाएं, ताकि प्रदेश की प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सके।उन्होंने विश्वविद्यालयों की नैक (NAAC) और एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी विश्वविद्यालयों को रैंकिंग सुधार के लिए स्पष्ट और प्रभावी रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।
गांवों को गोद लेकर बढ़ाएं नवाचार और स्टार्टअप
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां इनोवेशन एवं स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा देने कहा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध ज्ञान, विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए।
विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार एवं उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ संकल्प अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और विद्यार्थियों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करने कहा।
परीक्षा व्यवस्था हो पारदर्शी और लीक-प्रूफ
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में इंटरनल ऑडिट अनिवार्य रूप से कराने और इसके लिए इंटरनल कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं लीक-प्रूफ बनाने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रकों की आधिकारिक नियुक्ति सुनिश्चित करने कहा।उन्होंने आयुष विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित निजी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि इन संस्थानों का संचालन निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप सुनिश्चित हो सके।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव कृषि विभाग डॉ. सिद्धार्थ कोमल परदेशी, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त रितेश अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिव उपस्थित थे।



