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उत्कृष्ट विवेचना से पीड़िता को मिला न्याय, आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास।

विकास नंद/सर्वव्यापी

पुलिस की उत्कृष्ट विवेचना, पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और प्रभावी न्यायालयीन प्रस्तुतिकरण के चलते नाबालिग पीड़िता को न्याय मिला है। नाबालिग से दैहिक शोषण करने और उसका अश्लील वीडियो बनाकर व्हाट्सऐप एवं इंस्टाग्राम पर वायरल करने के मामले में सरायपाली की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी दीपक देवागंन, पिता खगेश देवागंन, निवासी भंवरपुर, तहसील बसना को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर विभिन्न धाराओं के तहत कुल 4 लाख 90 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।पुलिस के अनुसार आरोपी ने करीब तीन वर्ष पूर्व नाबालिग पीड़िता से मोबाइल नंबर लेकर व्हाट्सऐप एवं फोन कॉल के जरिए बातचीत शुरू की थी। शादी का प्रलोभन देकर और बहला-फुसलाकर आरोपी ने पीड़िता का दैहिक शोषण किया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपी ने घटना का वीडियो भी बना लिया और उसे वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैकमेल करता रहा। इसके बाद पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध कई बार उसका शोषण किया गया।जब पीड़िता ने आरोपी से मिलने से इनकार कर दिया तो आरोपी ने अपने मोबाइल में बनाया गया अश्लील वीडियो व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर वायरल कर दिया। परिजनों की शिकायत पर थाना बसना में 22 अप्रैल 2025 को अपराध क्रमांक 167/2025 दर्ज कर जांच शुरू की गई।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने खोली आरोपी की करतूत

मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालीन एसडीओपी सरायपाली ललिता मेहर ने स्वयं प्रकरण की विवेचना की। पुलिस ने पीड़िता एवं अन्य साक्षियों के कथन दर्ज करने के साथ व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए। वीडियो एवं तकनीकी साक्ष्यों को विधिवत परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया, जहां से प्राप्त प्रमाणित रिपोर्ट को प्रकरण में शामिल किया गया।पुलिस द्वारा निर्धारित समयावधि में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा संकलित पुख्ता साक्ष्यों, साक्षियों के कथनों और प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रमाणित हुए।

विभिन्न धाराओं में कठोर सजा

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो वंदना दीपक देवागंन की अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में भी अलग-अलग सजा एवं अर्थदंड लगाया गया। सभी अपराधों के लिए कुल 4.90 लाख रुपये अर्थदंड निर्धारित किया गया।पुलिस के मुताबिक चालान पेश होने के बाद भी प्रकरण की लगातार ट्रायल मॉनिटरिंग की गई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक लोचन प्रसाद साहू एवं वनस्वरूप सेन ने प्रभावी पैरवी की।पुलिस की उत्कृष्ट विवेचना, तकनीकी साक्ष्यों के संकलन और प्रभावी न्यायालयीन प्रस्तुतिकरण के परिणामस्वरूप आरोपी को दोषसिद्धि हुई और पीड़िता एवं उसके परिवार को न्याय मिला।

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