
नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ (सर्वव्यापी)

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-2026 में शानदार सफलता हासिल करने वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय डोंगरिया एवं लाटा के 10 मेधावी विद्यार्थियों ने कलेक्टर विजय दयाराम के. से सौजन्य भेंट की। जिले के लिए गौरव का विषय बनी इस उपलब्धि पर कलेक्टर ने सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा स्मृति-स्वरूप उपहार भी भेंट किए।
विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कलेक्टर ने उनकी शैक्षणिक यात्रा, भविष्य की योजनाओं और जीवन के लक्ष्यों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने जिले में लौटकर जनसेवा करना ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ आगे बढ़ने तथा अपनी सफलता से अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करने का आह्वान किया। कलेक्टर ने विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में हुई मुलाकात के अनुभव भी साझा किए और कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही बड़ी सफलता की पहचान है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के पीछे आदिवासी विकास विभाग की सतत शैक्षणिक पहल, सुनियोजित मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर के नेतृत्व में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा सतत प्रोत्साहन उपलब्ध कराया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।वहीं, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय डोंगरिया के प्राचार्य राजीव कुमार पांडे एवं एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय लाटा के प्राचार्य अमित कुमार सहित दोनों विद्यालयों के शिक्षकों और समूचे स्टाफ की निरंतर मेहनत, अनुशासित शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण ने इस सफलता को नई ऊंचाई दी है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयास आज जिले के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं।
उल्लेखनीय है कि नीट-2026 में सफलता प्राप्त करने वाले 10 विद्यार्थियों में 8 बालिकाएं और 2 बालक शामिल हैं। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय लाटा से मोहनीश कुमार, शालिनी पैकरा, गायत्री ओट्टी, निमेंद्र कुमार और दुच्छा पैकरा, जबकि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय डोंगरिया से हेमनंदनी पैकरा, राजनंदनी पोर्ते, आश्मा, रश्मी उरेती और शालू पोर्ते ने सफलता अर्जित कर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का नाम गौरवान्वित किया है।
यह उपलब्धि न केवल इन विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि आदिवासी शिक्षा को नई दिशा देने वाले प्रशासन, आदिवासी विकास विभाग और एकलव्य विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों की भी प्रेरक मिसाल है।




