
विकास नंद/सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से लगे महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड में धान खरीदी के दौरान अवैध धान के परिवहन और खपाने पर अंकुश लगाना प्रशासन के लिए हर साल बड़ी चुनौती रहता है। पिछले वर्ष कलेक्टर के निर्देश पर अवैध धान के खिलाफ की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई में तहसीलदार श्रीधर पंडा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी सक्रियता से अवैध धान के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने और शासन को संभावित राजस्व नुकसान से बचाने में मदद मिली थी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप इस वर्ष भी 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने जा रही है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान के परिवहन, भंडारण और खरीदी केंद्रों में खपाने की कोशिशों को रोकने की चुनौती एक बार फिर सामने होगी।
पिछले साल की कार्रवाई से जगी उम्मीद
पिछले धान खरीदी सीजन में प्रशासनिक निर्देशों के तहत सरायपाली क्षेत्र में अवैध धान के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की गई थी। इस अभियान में तहसीलदार श्रीधर पंडा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण ओडिशा से अवैध धान लाकर छत्तीसगढ़ के खरीदी केंद्रों में खपाने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में निगरानी, जांच और त्वरित कार्रवाई के जरिए शासन को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान पर अंकुश लगाना जरूरी है।
इस बार भी अनुभवी अधिकारियों के भरोसे निगरानी
इस वर्ष धान खरीदी की तैयारियों के बीच सरायपाली क्षेत्र में अवैध धान पर नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों में पिछले साल की तरह अनुभवी अधिकारी भी शामिल हैं। ऐसे में पिछले सीजन में हासिल अनुभव का लाभ इस बार भी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।धान खरीदी को पारदर्शी बनाने के लिए सीमावर्ती रास्तों पर निगरानी, संदिग्ध धान परिवहन की जांच, भंडारण स्थलों का सत्यापन और खरीदी केंद्रों पर कड़ी नजर रखना अहम होगा। प्रशासन की सतर्कता से ही अवैध धान की आवक पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
किसानों के हितों की रक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे और बिचौलियों अथवा अवैध कारोबारियों को व्यवस्था का दुरुपयोग करने का अवसर न मिले, इसके लिए प्रशासन को मुस्तैद रहना होगा।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि पिछले साल की कार्रवाई से मिली सीख के आधार पर इस बार प्रशासन अवैध धान के कारोबार पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।
धान खरीदी की शुरुआत से पहले ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में तहसीलदार श्रीधर पंडा सहित संबंधित अधिकारियों के अनुभव और सक्रियता की परीक्षा एक बार फिर होगी।




