
विकास नंद/सर्वव्यापी

विद्यालयों में 100-100 दीप प्रज्ज्वलित करने के आदेश पर सवाल—क्या शिक्षा की बुनियादी समस्याओं पर भी दिखेगी ऐसी ही तत्परता?सरायपाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रव्यापी सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित किए जा रहे ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर सरायपाली विकासखंड शिक्षा अधिकारी की ओर से विकासखंड के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों को 100-100 दीप प्रज्ज्वलित करने का निर्देश जारी किया गया है। कार्यक्रम को लेकर शिक्षा विभाग की सक्रियता और निर्देशों की तेजी अब चर्चा का विषय बन गई है।विद्यालयों में दीप प्रज्ज्वलित करना सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से सकारात्मक पहल हो सकती है, लेकिन इसी के साथ शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जब विद्यालयों को 100 दीप जलाने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए जा सकते हैं, तो बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था को सुधारने के लिए ऐसी ही फुर्ती क्यों नहीं दिखाई जाती?
दीपों की रोशनी के साथ क्या विद्यालयों की समस्याएं भी होंगी दूर?सरायपाली विकासखंड के अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता, विषयवार शिक्षकों की कमी, भवनों की स्थिति, शौचालय, पेयजल, बिजली, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता और अन्य बुनियादी सुविधाएं लगातार महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि विभाग की प्राथमिकता में विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कराना अधिक महत्वपूर्ण है या विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना?एक ओर विद्यालयों को 100 दीप जलाने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यदि किसी विद्यालय में आवश्यक संसाधनों की कमी है तो उन समस्याओं के समाधान के लिए भी क्या इसी गति से आदेश और कार्रवाई होगी? अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों का सवाल है कि जिस ऊर्जा और तत्परता के साथ आयोजन संबंधी निर्देश जारी किए जाते हैं, उसी तत्परता से शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने की पहल कब होगी?
‘आशीर्वाद का दीया’ के साथ ‘शिक्षा का दीया’ भी जरूरी
कार्यक्रम में जलने वाले दीप आशीर्वाद और सेवा भावना का प्रतीक हैं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक मजबूती तभी संभव है जब प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और मूलभूत सुविधाओं की रोशनी पहुंचे।सवाल यह भी है कि यदि विभाग वास्तव में विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर गंभीर है, तो क्या विकासखंड के प्रत्येक विद्यालय की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा? क्या जिन विद्यालयों में शिक्षकों या सुविधाओं की कमी है, वहां समयबद्ध तरीके से सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे?
आयोजन पर फोकस या शिक्षा सुधार पर?
शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों के लिए विद्यालयों को निर्देश जारी किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करना विभागीय जिम्मेदारी का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि विद्यालयों की मूल शैक्षणिक आवश्यकताओं को नजरअंदाज न किया जाए।
100 दीप प्रज्ज्वलित करने की फुर्ती देखकर अब जनता का सवाल सीधा है—बदहाल शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विभाग इतनी ही फुर्ती कब दिखाएगा?
यदि विद्यालयों में दीप जलाने का उद्देश्य बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना है, तो उस उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहतर शिक्षक, बेहतर संसाधन, बेहतर व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग आयोजन की रोशनी से आगे बढ़कर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों पर कब प्रकाश डालता है।




