
संपादकीय, ज़िया खान, सर्वव्यापी
राजनीतिक दिरिष्ट से देखा जाय तो देश की राजनीति केंद्र या केंद्र का नेतृत्व जिस हिसाब से बिसात बिछा कर सत्ता , कार्यालय, न्यायालय,चुनाव आयोग का पालन या राजनैतिक शब्दों की भाषा में समझें तो उपयोग कर देश की कमान संभाली है उसे डिगाने ढाने का प्रयास या हथकंडे विपक्ष के समझ से परे है । संतुष्टि के लिए ऐसे समाचार या आदेश देखें और सुने जाते हैं कि चुनाव आयोगों से जवाब मांगा गया अब दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा या यह सवाल पर घिरी सरकार विपक्ष एक जुट एविएम से नहीं होंगे चुनाव ऐसे लाली पाप आते हैं या यह कहें लाय जाते हैं ताकि विपक्ष का हौसला और जनता का विस्वास बना रहे ।पर जिस मुद्दे या माहौल को बनाकर एक राज्य की उठा पटक किया जाता है वहीं शांत और बैकफुट पर कुछ समय के लिए दिखने वाली भाजपा परिणाम बिल्कुल विपरित ला कर जनता को चौका देती है वहीं विपक्ष को मौन कर देती है । सच तो यह देखा जा रहा है कि * *जितनी तेजी से विपक्ष सोचता और प्रयास करता है उससे हजारों गुना तेज केंद्र का नेतृत्व बिसात बिछाती है** या यह भी कहा जा सकता है कि केंद्र नैत्रित्व जिस दिशा जिस मुद्दे कि बिसात बिछा कर देती है उसी परछाई पर दौड़ लगाने लगती है जब विपक्ष को पता चलता है कि इसकी कमान तो केंद्र के हाथ में थी तब तक बहुत देर हो जाती है और विपक्ष को कारण समझ पाना मुश्किल हो जाता है ।वहीं विपक्ष लगातार इस तरहां का आरोप लगाता आता रहा है यह संस्था केंद्र की कठपुतली बन चुकी है सभी जगह अपने विचार के लोगों को सरकार बिठा चुकी है सभी बड़े मीडिया सरकार का गुणगान कर रहे हैं ।सोचने वाली बात यह है कि जब सभी संस्थाओ का कंट्रोल केन्द्र के पास है फिर विपक्ष प्रयास किस कांफिडेंस से मुकाबले और हराने के लिए करती है कया यह दिखावा है ? लोगों को यह समझाने का प्रयास विपक्ष करता आ रहा है पर धोखा खुद खा रहा है यह सवाल जनता के मन में उठने लगे हैं कि विपक्ष अब मुकाबले के लायक नहीं रहा या कोई और बात है । देशकी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के आला कमान कहो या हीरो प्रयास बेहतर करते दिखते हैं इससे इन्कार नहीं किया जा सकता पर प्रयास हवा में तीर चलाए जैसा परिणाम देता है यह विचार का विषय बनता जा रहा है । *क्या सबसे बड़े विपक्ष के कद को काकरोच आन्दोल ने फीका किया ?* काक्रोच आंदोलन के रूप में उठने वाली आवाज जहां तक युवाओं की आवाज और देश की युवा सोच को नई दिशा देने की आस के रूप में चर्चा का विषय बनी साथ साथ विपक्ष के चर्चा कद प्रयासों को थोड़ा दिशा देने के रूप में भी देखी जा सकती है यह युवा आंदोलन कोई राजनैतिक पार्टी नहीं और आगे अगर किसी पार्टी को समर्थन ना दे फिर भी विपक्ष की दिशा को थोड़ा विराम लगाने के रूप में भी देखी जा सकती है यही कारण है कि विपक्ष उसे साधने भुनाने का प्रयास करता दिखता है ?बाकी अगले अंक मे




