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एआई से महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीर बनाकर सोशल मीडिया पर डालना गंभीर साइबर अपराध: महिला आयोग।

विकास नंद/सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के माध्यम से किसी महिला की आपत्तिजनक तस्वीर तैयार कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में पीड़ित महिला को तत्काल कानूनी कार्रवाई कराने और एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार है।

राज्य महिला आयोग कार्यालय, रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय द्वितीय जनसुनवाई में अध्यक्ष डॉ. ममता साहू एवं सदस्य सुश्री दीपिका शोरी ने महिला उत्पीड़न से संबंधित 30 प्रकरणों को सुनवाई के लिए रखा। इनमें से 17 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जबकि 5 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया।

एआई से आपत्तिजनक तस्वीर बनाने का मामला पहुंचा आयोग

जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने शिकायत की कि कुछ लोगों द्वारा एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार की जा रही हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे साइबर अपराध से जुड़ा मामला माना। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए प्रकरण को अगली सुनवाई के लिए रखा गया।

निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की शिकायत पर पुनर्विचार

सुनवाई के दौरान कुछ महिलाओं ने अपने प्रकरणों में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की शिकायत भी आयोग के समक्ष रखी। आयोग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक परीक्षण और पुनर्विचार की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही।पति-पत्नी के बीच विवाद और प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की जानकारी दी गई। आयोग ने मामले को निगरानी में रखने का निर्णय लिया। वहीं, संपत्ति विवाद एवं पारिवारिक प्रताड़ना से जुड़े मामलों में महिलाओं को विधिक सहायता लेने, आवश्यक परामर्श प्राप्त करने तथा शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी गई।

डिजिटल उत्पीड़न के खिलाफ तत्काल शिकायत की अपील

अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा कि महिला आयोग महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और न्याय की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ने के साथ महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की।

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