
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ म खेती किसानी अउ हरियारी ले गहिरा जुराव हे।ए तिहार के दिन मनखे मन नांगर अउ खेती किसानी के जीनिस के पूजा पाठ करथें। संगे संग भगवान ले खेती पाती म बने धान चाउर होय के अरज घलो करथें।छत्तीसगढ़ के संस्कृति म हरेली ल बछर के पहिली तिहार माने जाथे। सावन अमावस के दिन मनाय जवइया ए तिहार किसान मन बर बनेच महत रखथे। खेती के बुता,कोपर,बियासी, थरहा सब्बो होय के बाद किसान मन थोरकिन थीरा के प्रकृति अउ अपन खेती के जिनीस मन बर आभार जताथें। एकर बर नांगर, कोपर कुदारी, रापा अउ गैंती टंगीया,साबर बसुला सब्बो मन ल धो के ओकर पूजा पाठ करथे फेर एहर कोनो धार्मिक बुता नोहय भलुक मिहनत अउ रोजी-रोटी के साधन मन के सम्मान के संस्कृति आय।हरेली कहे ले गेड़ी म दौड़त लइका मन के टोली अउ रूख मन म झूलत रहचुली के सुरता आ जाथे। बांस के बने गेड़ी संतुलन, हिम्मत अउ गांव के सादा सरल सिरजन के चिन्हा आय। गांव मन म गेड़ी दउड़,नरियर फेंकउला प्रतियोगिता के आरो ले माहौल तिहरहा हो जाथे। फेर आजकल मनोरंजन के साधन आय अउ बढ़त नगरीकरण के कारन गांवो घलौक नइ बाचे हे अब पहिली जइसे सोर नइ जनाय खाली सोशल मीडिया म अपन फोटो लगा हरेली तिहार के बधाई बना एक दुसर ल बधाई दे नेंग पूरा कर लेथे।ए मुड़ा म पूर्ववर्ती सरकार बड़ निक पहल करे हेबय नंदात खेल के बढ़वार करे बर गेड़ी ल छत्तीसगढ़िया ओलंपिक म संघेरे हेबय।काबर की एही लोकपरंपरा नवा पीढ़ी मनला अपन संस्कृति अउ जरी ले जोर के राखथे।हरेली हमन ल प्रकृति के सम्मान करे के संदेश घलो देथे। ए दिन घर के मेन दुआरी म लीम अउ भेलवा के डार लगाय के परंपरा हेवय। लोकमान्यता हेबय कि एखर ले घर अउ खेत के रक्षा होथे। विज्ञान के मुड़ा ले घलो लीम के औषधीय गुण स्वास्थ्य अउ पर्यावरण बर लाभकारी माने गय हेबय। लोहार मन घर के दुआरी के चौखट म खीला ठोंक के असीस देथें। एकरो मान्यता हवय कि एखर ले घर म रहइय्या मन करिया जादू ले बांचे रहिथें। हमर परंपरा बताथे कि हमर तइहा मन प्रकृति अउ स्वास्थ्य के संबंध ल बहुतेच सुग्घर ढंग ले समझत रहिन।ए दिन घरो घर म गुड़हा चीला, ठेठरी, खुरमी, फरा अउ कतकों किसिम के रोटी पीठा बनाय जाथे। परिवार के जम्मो झन एके संग बइठ के भोजन करथें अउ खुशी बांटथें। एही अपनपन के कारन ए तिहार समाजिक एकता अउ कुटुंब परिवार के मेल-जोल के रूप म बड़े तिहार के रूप म मनाय जाथे। विकास के दउड़ म हरियर भूइया कम होत जात हवय अउ प्रकृति ले हमर रिश्ता घलौक कमजोर होत जात हेवय, अइसन म हरेली के महता अउ बढ़ जाथे। ए तिहार हमन ल सुरता दिलाथे कि जल, जंगल, पशुधन अउ किसान के अथक मिहनत ले जिनगी चलथे। जब तक प्रकृति सुरक्षित रहही, तब तक हमर भविस घलो सुरक्षित रहही। ए आलेख त्रिभुवन लाल साहू,बोड़सरा,जांजगीर चांपा के लिखे आय..!!




