
विकास नंद/ सर्वव्यापी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से छत्तीसगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत हो गई है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाना है। अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ सहित सेवा, स्वच्छता, जनकल्याण और जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।लेकिन इन आयोजनों के बीच जनता के मन में एक बुनियादी सवाल भी उठ रहा है—क्या केवल दीप जलाने और राजनीतिक आयोजनों से विकास की वास्तविक तस्वीर बदलेगी? आम नागरिकों की अपेक्षा अब प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से आगे बढ़कर जमीन पर दिखाई देने वाले विकास की है।छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी क्षेत्रों में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की बड़ी चुनौती है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में खराब सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों तथा बिजली-पानी जैसी मूलभूत जरूरतों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।सरकार की ओर से सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी और जनकल्याण से जोड़ने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी अभियान को केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला न बनाकर सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता से जोड़ने की अपील की है।ऐसे में इस अभियान की वास्तविक सफलता का पैमाना भी यही होना चाहिए कि आम आदमी के जीवन में कितना ठोस बदलाव आता है। जिस परिवार का बच्चा बेहतर शिक्षा चाहता है, मरीज समय पर विशेषज्ञ उपचार चाहता है, किसान और ग्रामीण बेहतर सड़क चाहते हैं, घर बिजली और साफ पानी चाहता है तथा नागरिक सुरक्षित वातावरण और प्रभावी कानून-व्यवस्था की अपेक्षा करता है—उनकी समस्याओं का समाधान ही शासन की सेवा का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाएगा।राजनीतिक और सरकारी आयोजनों से माहौल जरूर बन सकता है, लेकिन जनता की उम्मीदें अब नारों और आयोजनों से आगे निकल चुकी हैं। उसे ऐसी सड़क चाहिए जिस पर गड्ढे न हों, ऐसा अस्पताल चाहिए जहां समय पर उपचार मिले, ऐसा स्कूल चाहिए जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, ऐसी बिजली व्यवस्था चाहिए जिसमें अनिश्चितता न हो और ऐसी कानून-व्यवस्था चाहिए जिसमें आम नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।दीपक उम्मीद का प्रतीक हो सकता है, लेकिन विकास की असली रोशनी तब मानी जाएगी जब शासन की योजनाओं और दावों का असर जनता की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई दे।अब देखना यह होगा कि ‘सेवा संकल्प’ का यह महीना सरकारी और राजनीतिक आयोजनों तक सीमित रहता है या वास्तव में जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान का संकल्प बनकर जमीन पर उतरता है।




