
विकास नंद/ सर्वव्यापी
विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 20 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाली ग्राम सभाएं महत्वपूर्ण होंगी। इन ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को योजना के प्रावधानों, अधिकारों, लाभों एवं अनुमेय कार्यों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों का ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त को पत्रकार वार्ता में कहा था कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत सभी विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा की स्वीकृति से किया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा एवं वीबी-जीरामजी के माध्यम से राज्य को करीब 6 हजार 855 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। यह ग्रामीण रोजगार और विकास कार्यों के लिए राज्य में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश है। योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 5,591.42 करोड़ रुपए का प्रस्तावित बजट रखा गया है, जबकि प्रथम किस्त के रूप में भारत सरकार से 1,538 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है।‘
मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ अभियान 26 जनवरी 2027 तक
मुख्यमंत्री साय द्वारा शुरू किया गया ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक चलेगा। इसके तहत प्रत्येक गांव में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों सहित अन्य विकास कार्यों का चयन ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की सहभागिता एवं स्वीकृति के आधार पर होगा।
ग्रामीणों की मांग के आधार पर तय होंगे कार्य
20 अगस्त की ग्राम सभाओं में गांव की स्थानीय आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों की मांग के आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कार्यों पर चर्चा होगी। प्रस्तावित कार्य ग्राम सभा के समक्ष रखे जाएंगे और अनुमोदन के बाद नियमानुसार स्वीकृति एवं क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ाए जाएंगे।
318 प्रकार के कार्य चार प्रमुख श्रेणियों में
वीबी-जीरामजी के तहत 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें 107 जल संरक्षण एवं जल संवर्धन, 90 ग्रामीण अधोसंरचना, 86 आजीविका संवर्धन तथा 35 जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्य शामिल हैं।
ग्राम सभाएं स्थानीय जरूरत के अनुसार प्राथमिकता वाले कार्यों का चयन कर सकेंगी।जल संरक्षण के तहत तालाब, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, सिंचाई विस्तार, भू-जल एवं मृदा संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे कार्य किए जा सकेंगे। वहीं ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल कक्ष, ग्रामीण पुस्तकालय, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा मुक्तिधाम जैसे कार्य शामिल हैं।
2 अक्टूबर से तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना
20 अगस्त की ग्राम सभा में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी। ग्राम सभा एवं स्थानीय समुदाय की अनुशंसाओं और सहभागिता के आधार पर 2 अक्टूबर 2026 से वीजीपीपी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह योजना ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के अनुरूप तैयार की जाएगी।ग्राम सभाओं में ग्रामीणों से गांव की आवश्यकताओं, प्राथमिकताओं और संभावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव लिए जाएंगे, ताकि वीजीपीपी निर्माण में इन सुझावों का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
अनुमोदित कार्यों की शीघ्र स्वीकृति पर जोर
योजना के तहत उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा में अनुमोदित कार्यों को जल्द स्वीकृति देकर क्रियान्वयन में लाने पर जोर रहेगा। रोजगार की मांग के अनुसार श्रमिकों को समय पर काम उपलब्ध कराने, मजदूरी का समय पर भुगतान तथा कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय के अनुसार कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वर्ष में 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान है। ऐसे में उपलब्ध कार्य अवधि का प्रभावी उपयोग करते हुए ग्राम सभा से अनुमोदित कार्यों को समय पर शुरू करना जरूरी है।
विकसित और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण पर जोर
वीबी-जीरामजी का उद्देश्य केवल ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, स्वच्छता, शिक्षा, आजीविका और सामाजिक सुविधाओं को मजबूत करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है। ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता मिल सकेगी।




