
विकास नंद/ सर्वव्यापी
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में महासमुंद जिले ने धान खरीदी के मामले में प्रदेश में सर्वाधिक खरीदी करने वाले जिले के रूप में अपनी पहचान बनाई। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व और प्रशासनिक निगरानी में किसानों के लिए सुगम, पारदर्शी एवं व्यवस्थित धान खरीदी व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप जिले में 1,49,759 किसानों से 10,19,568.12 मीट्रिक टन धान खरीदा गया।जिले में धान खरीदी के लिए कुल 1,60,118 किसानों का पंजीयन किया गया था। इनमें से 93.53 प्रतिशत यानी 1,49,759 किसानों ने अपनी उपज का विक्रय किया। किसानों को अपने गांव और क्षेत्र के नजदीक धान बेचने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले में 182 धान उपार्जन केन्द्र संचालित किए गए।
खरीदी के बाद उठाव में भी 99.43 प्रतिशत सफलता
महासमुंद जिले में धान खरीदी के साथ ही उपार्जित धान के सुरक्षित भंडारण और समयबद्ध उठाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया। समितियों द्वारा अब तक 10,13,782.07 मीट्रिक टन धान का उठाव एवं निराकरण किया जा चुका है, जो कुल खरीदे गए धान का 99.43 प्रतिशत है।वहीं निर्धारित 5,41,421.91 मीट्रिक टन सीएमआर लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 2,05,677.89 मीट्रिक टन चावल जमा कराया जा चुका है। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए जिले में 5 धान संग्रहण केन्द्र भी उपलब्ध रहे।
छोटे और सीमांत किसानों को भी मिला लाभ
जिला खाद्य शाखा के अनुसार जिले में 5 एकड़ तक के 26,352 से अधिक किसानों को धान बोनस राशि का लाभ मिल रहा है। इनमें 1 से 2.5 एकड़ तक के करीब 14,046 सीमांत किसान तथा 2.5 से 5 एकड़ तक के करीब 12,306 लघु किसान शामिल हैं।धान खरीदी की व्यवस्था में किसानों को उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, उपार्जन केन्द्रों तक आसान पहुंच तथा खरीदी के बाद धान के सुरक्षित प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
2026-27 में 20 नए खरीदी केन्द्रों को मंजूरी
आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों को और अधिक सुविधा देने के लिए जिले में 20 नवीन धान उपार्जन केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें महासमुंद में 2, बागबाहरा में 5, पिथौरा में 1, बसना में 11 तथा सरायपाली में 1 नया केन्द्र शामिल है।
इस तरह पिछले वर्ष धान खरीदी में प्रदेश में अग्रणी प्रदर्शन करने के बाद अब आगामी खरीफ सीजन के लिए भी प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व में धान खरीदी व्यवस्था के आंकड़े न केवल जिले की उपलब्धि को दर्शाते हैं, बल्कि किसानों के लिए प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं के प्रभाव को भी रेखांकित करते हैं।




