
विकास नंद/सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में सुशासन और जवाबदेही को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अमृतलाल रोहलेडर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने यह कार्रवाई 15 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर की है।
विभागीय आदेश के मुताबिक डॉ. रोहलेडर के विरुद्ध सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने, महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रति अशोभनीय एवं अमर्यादित टिप्पणी करने तथा अनुचित स्पर्श किए जाने संबंधी गंभीर आरोपों की शिकायत प्राप्त हुई थी।
जांच में प्रथम दृष्टया आरोप पाए गए सही
शिकायत की जांच के दौरान संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। जांच प्रतिवेदन के आधार पर डॉ. रोहलेडर के विरुद्ध अनुचित भाषा के प्रयोग एवं अनुचित स्पर्श किए जाने संबंधी आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट होना पाया गया।जांच अधिकारी ने उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की। आदेश में कहा गया है कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर रहते हुए किया गया उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन की श्रेणी में आता है तथा गंभीर कदाचरण को परिलक्षित करता है।
राज्य सरकार ने लिया तत्काल प्रभाव से निलंबन का निर्णय
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत डॉ. अमृतलाल रोहलेडर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, जगदलपुर संभाग, बस्तर निर्धारित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता भी होगी।
महिला कर्मचारियों की गरिमा और कार्यस्थल की मर्यादा पर सरकार का सख्त संदेश
सरकार की इस कार्रवाई को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही, अनुशासन और कार्यस्थल की गरिमा बनाए रखने की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है। खासतौर पर महिला कर्मचारियों के प्रति अशोभनीय व्यवहार के गंभीर आरोपों पर उच्च पदस्थ अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई से यह संदेश गया है कि सरकारी पद पर रहते हुए आचरण संबंधी नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
हालांकि आदेश में लगाए गए आरोपों को जांच में प्रथम दृष्टया पुष्ट बताया गया है और मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया में है। अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना विभागीय प्रक्रिया के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।




