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क्या राजमेरगढ़ बनेगा नया पर्यटन केंद्र?…कलेक्टर के फैसले से कैसे बदलेगी इलाके की तस्वीर… पढ़ें खास खबर।

नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ, (सर्वव्यापी)

जिले के दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों को पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और रोजगार से जोड़ने की दिशा में कलेक्टर विजय दयाराम के.ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार को राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा, अगरियापारा, छोटकीरेवार और केवची क्षेत्र का व्यापक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि जिले के प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए उन्हें स्थानीय लोगों की आजीविका का मजबूत आधार बनाया जाएगा।राजमेरगढ़ पहुंचकर कलेक्टर ने बैगा जनजाति के पारंपरिक आवासों को होम-स्टे के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिलेगा, वहीं ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि होगी। इसके साथ ही राजमेरगढ़ के ट्रेकिंग प्वाइंट को विकसित कर साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर कबीर चबूतरा भी पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने सीसी रोड की जानकारी लेने के साथ ही क्रेडा विभाग को सोलर ड्यूल पंप का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक शौचालय निर्माण पर भी अधिकारियों से चर्चा की।

कलेक्टर ने चरण कुंड, कबीर वट सहित अन्य धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की जानकारी ली। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार और पूर्णिमा के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कलेक्टर ने इन धार्मिक स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास की संभावनाओं पर भी अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

अगरियापारा स्थित बहुउद्देशीय केंद्र के निरीक्षण के दौरान उन्होंने केवची वन धन केंद्र के संग्रहण हेतु कक्ष आवंटित कर उसका नियमित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वन उपज से जुड़े ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

इसके बाद कलेक्टर ने छोटकीरेवार आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता जांची। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की संख्या, पोषण व्यवस्था तथा क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली। वहीं केवची में प्रस्तावित जनजातीय संग्रहालय के लिए उपयुक्त भूमि का चयन करने के निर्देश देकर जनजातीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया।

ग्रामीण अंचलों के इस दौरे से यह स्पष्ट हुआ कि कलेक्टर विजय दयाराम के जिले के विकास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि पर्यटन, संस्कृति, जनजातीय विरासत और स्थानीय रोजगार को एक साथ जोड़कर विकास का नया मॉडल तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

यदि इन योजनाओं पर समयबद्ध अमल होता है, तो राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

निरीक्षण के दौरान वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद, भारतीय वन सेवा प्रशिक्षु अधिकारी गौतम पडिभार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश मिश्रा, एसडीएम पेंड्रारोड अमित बेक, ग्राम पंचायत की सरपंच सुरंजना आयाम सहित वन, राजस्व, पंचायत एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कलेक्टर को विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति से अवगत कराया तथा उनके निर्देशों के अनुरूप कार्यों में तेजी लाने का भरोसा दिलाया।

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