
विकास नंद/सर्वव्यापी
मतदाता सूची में छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने और 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके ऐसे युवाओं, जिनका नाम अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो पाया है, उन्हें मताधिकार से जोड़ने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिले के सभी बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालांकि, छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए दोबारा विशेष अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मतदाता सूची के पूर्व पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों के मन में यह चर्चा होने लगी है कि यदि पहले की प्रक्रिया में सभी पात्र मतदाताओं के नाम शामिल कर लिए गए थे, तो अब दोबारा छूटे हुए नामों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
पहले के पुनरीक्षण में क्या छूट गया?
मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल करना और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है। इसके बावजूद यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में दर्ज नहीं हो पाता या किसी मतदाता का नाम कट जाता है, तो यह संबंधित नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।विशेष अभियान के जरिए ऐसे मतदाताओं को सूची में शामिल करने का अवसर मिलेगा। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि पूर्व पुनरीक्षण के दौरान कितने पात्र मतदाताओं के नाम छूटे, कितने नाम हटाए गए और इन त्रुटियों के पीछे क्या कारण रहे। इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आने से पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हो सकती है।
SIR की प्रक्रिया पर भी उठने लगे सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसी प्रक्रियाओं के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर आम नागरिकों में जागरूकता तथा पारदर्शिता बेहद जरूरी है। ऐसे में दोबारा विशेष अभियान चलाए जाने की जानकारी के बाद यह अपेक्षा की जा रही है कि निर्वाचन विभाग पूर्व पुनरीक्षण की स्थिति और नए अभियान के उद्देश्य को स्पष्ट करे।लोकतंत्र में मतदाता सूची केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि नागरिक के मताधिकार का आधार है। इसलिए जरूरी है कि कोई भी पात्र नागरिक केवल प्रक्रिया संबंधी त्रुटि या जानकारी के अभाव में अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विशेष अभियान के दौरान कितने छूटे हुए मतदाताओं और नए युवा मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाते हैं तथा निर्वाचन विभाग पूर्व पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।



