
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के शासकीय कार्यालयों और संस्थानों में किन महापुरुषों एवं संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के चित्र लगाए जाएं, इसे लेकर छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने छत्तीसगढ़िया एकता मंच के ज्ञापन पर अपना जवाब दिया है। मंच की ओर से प्रदेश अध्यक्ष , जिलाध्यक्ष देवेंद्र बंजारे, प्रदेश सचिव भागवत प्रसाद लोधी के नेतृत्व में शासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई थी कि प्रदेश के सरकारी कार्यालयों एवं शासकीय संस्थाओं में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्य निर्माता एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी तथा छत्तीसगढ़ महतारी के चित्रों को प्रमुखता से स्थान दिया जाए।मंच के ज्ञापन के जवाब में सामान्य प्रशासन विभाग ने 16 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर 13 अगस्त 2019 और 28 जून 2022 को जारी विभागीय परिपत्रों की प्रतियां आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी हैं। विभाग ने अपने जवाब में किसी नए निर्णय की घोषणा करने के बजाय पहले से लागू सरकारी नियमों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।2019 के परिपत्र में क्या है प्रावधान?सामान्य प्रशासन विभाग के 13 अगस्त 2019 के परिपत्र के अनुसार शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, वर्तमान राष्ट्रपति और वर्तमान प्रधानमंत्री के चित्र लगाए जाना आवश्यक है। इसके अलावा पं. जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित अन्य राष्ट्रीय नेताओं के चित्र कार्यालय प्रमुख अपने विवेक से भवन के आकार, उपलब्ध राशि और मितव्ययिता को ध्यान में रखते हुए लगा सकते हैं।इसी परिपत्र में छत्तीसगढ़ के वर्तमान राज्यपाल और वर्तमान मुख्यमंत्री के चित्र भी निर्धारित कार्यालयों में लगाए जाने का निर्णय दर्ज है।2022 में ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का चित्र भी अनिवार्यइसके बाद 28 जून 2022 के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र में छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय भवनों, कार्यालयों और कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र को अनिवार्य रूप से लगाए जाने का निर्देश जारी किया गया था। परिपत्र में इसे प्रदेश की माटी के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के स्मरण से जोड़ा गया है।यानी शासन के अपने दस्तावेजों के अनुसार शासकीय परिसरों में तस्वीरों के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं।फिर नियमों के पालन पर सवाल क्यों?छत्तीसगढ़िया एकता मंच का कहना है कि शासन के नियम मौजूद होने के बावजूद जमीन पर तस्वीरों को लेकर एकरूपता दिखाई नहीं देती। मंच के प्रदेश अध्यक्ष तरुण कौशिक का कहना है कि यदि सामान्य प्रशासन विभाग ने तस्वीरों को लेकर स्पष्ट प्रावधान निर्धारित किए हैं, तो सभी विभागों, शासकीय संस्थाओं और कार्यालयों में उनका समान रूप से पालन होना चाहिए।मंच का सवाल यह भी है कि निर्धारित श्रेणी के अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों के चित्रों को शासकीय कार्यालयों में किस नियम के तहत प्रमुखता दी जा रही है? यदि किसी पदाधिकारी के चित्र लगाने के लिए अलग से शासनादेश या अधिकृत निर्देश हैं तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि तस्वीरों को लेकर भ्रम की स्थिति समाप्त हो।नेताओं के बड़े चित्र, छत्तीसगढ़ महतारी छोटे फ्रेम में क्यों?मंच ने सबसे गंभीर सवाल छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र को लेकर उठाया है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर छत्तीसगढ़ महतारी का चित्र लगाया तो जा रहा है, लेकिन उसकी तुलना में नेताओं के चित्र बड़े आकार में लगाए जाते हैं और छत्तीसगढ़ महतारी का चित्र छोटा कर दिया जाता है।यह स्थिति शासन के 28 जून 2022 के उस निर्देश की भावना पर सवाल खड़े करती है, जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र को सभी शासकीय भवनों, कार्यालयों और कार्यक्रमों में अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है।ज्ञापन से अब अनुपालन की बहस तकछत्तीसगढ़िया एकता मंच ने शासन से मूल रूप से यह मांग रखी थी कि सरकारी संस्थाओं में तस्वीरों की व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें राष्ट्र, संविधान, महापुरुषों और छत्तीसगढ़ की स्थायी सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता मिले। शासन की ओर से प्राप्त जवाब ने 2019 और 2022 के परिपत्रों को सामने रखकर तस्वीर लगाने के लिए मौजूद नियमों की पुष्टि कर दी है।अब असली सवाल नियम बनाने का नहीं, बल्कि उन नियमों के समान और वास्तविक अनुपालन का है।यदि शासन के अपने परिपत्रों में महात्मा गांधी, वर्तमान राष्ट्रपति, वर्तमान प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्रों को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं, तो प्रदेश के प्रत्येक संबंधित शासकीय कार्यालय में इनका पालन किस स्तर तक हो रहा है—इसकी निगरानी कौन कर रहा है? क्या सभी विभागों में तस्वीरों का आकार, स्थान और प्राथमिकता समान है? और यदि नियमों से अलग किसी मंत्री या अन्य राजनीतिक पदाधिकारी का चित्र लगाया जा रहा है, तो उसका अधिकृत आधार क्या है?इन सवालों का जवाब मिलने पर ही यह स्पष्ट होगा कि शासन के नियम केवल कागजों तक सीमित हैं या वास्तव में सरकारी संस्थानों की दीवारों तक भी पहुंच रहे हैं।



