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रायपुर में 1.18 करोड़ के वेतन घोटाले से मचा हड़कंप, महासमुंद के पुलिस सहकारी बैंक पर भी उठे सवाल निष्पक्ष जांच की उठने लगी मांग… पढ़े पूरी खबर।

विकास नंद/ सर्वव्यापी

300 से अधिक पुलिसकर्मियों की जमा पूंजी पर संकट की चर्चा, रिकवरी के नाम पर कर्मचारियों को नोटिस; बैंक की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच की उठने लगी मांग।

पुलिस विभाग को अनुशासन और कानून व्यवस्था का जिम्मेदार महकमा माना जाता है, लेकिन इसी विभाग के भीतर वित्तीय अनियमितताओं और कथित आर्थिक गड़बड़ियों के मामले सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल ही में रायपुर पुलिस विभाग में करीब 1.18 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले का मामला सामने आने के बाद अब महासमुंद जिले में पुलिसकर्मियों द्वारा संचालित पुलिस सहकारी बैंक की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। यहां बैंक में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी, जमा पूंजी की सुरक्षा और रिकवरी प्रक्रिया को लेकर पुलिस कर्मचारियों के बीच असंतोष की स्थिति बताए जा रही है।

रायपुर में वेतन शाखा से 1.18 करोड़ रुपये के गबन का आरोप

रायपुर के माना थाना पुलिस ने चौथी वाहिनी की वेतन शाखा में पदस्थ आरक्षक कमलेश कुमार साहू को कथित वेतन घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वेतन शाखा में पदस्थापना के दौरान उसने विभागीय वेतन एवं भत्तों के भुगतान में कथित हेरफेर कर सरकारी खजाने से लगभग 1.18 करोड़ रुपये अपनी मां के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की है।इससे पहले जुलाई 2026 में जगदलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ तीन कर्मचारियों पर भी वेतन एवं भत्तों में कथित हेरफेर कर अतिरिक्त राशि अपने खातों में स्थानांतरित करने का मामला सामने आया था। जांच के दौरान गबन की रकम का एक बड़ा हिस्सा शेयर मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किए जाने की बात भी सामने आई थी। इन घटनाओं ने पुलिस विभाग की आंतरिक वित्तीय निगरानी और वेतन भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

महासमुंद के पुलिस सहकारी बैंक में आखिर क्या चल रहा है?

रायपुर और जगदलपुर के मामलों के बीच महासमुंद जिले के पुलिस सहकारी बैंक की वित्तीय व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस कर्मचारियों के बीच चल रही चर्चाओं और सामने आ रही शिकायतों के अनुसार बैंक में जमा राशि, ब्याज भुगतान और वित्तीय लेन-देन को लेकर कई तरह की अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।बताया जा रहा है कि बैंक की कथित वित्तीय गड़बड़ियों के चलते 300 से अधिक पुलिसकर्मी प्रभावित हो सकते हैं। कर्मचारियों के बीच अपनी वर्षों की जमा पूंजी डूबने की आशंका को लेकर चिंता व्याप्त है। कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि बैंक की वित्तीय स्थिति और जमा रकम के हिसाब-किताब को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।

200 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस, पावती नहीं होने पर दोबारा जमा करने का दबाव!

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस सहकारी बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और राशि की रिकवरी के लिए विभागीय स्तर पर एक कमेटी गठित किए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि 200 से अधिक पुलिस कर्मचारियों को राशि जमा करने के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं।कुछ कर्मचारियों का कहना है कि जिनके पास पूर्व में जमा की गई रकम की पावती उपलब्ध नहीं है, उनसे दोबारा राशि जमा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक तरफ उनकी पुरानी जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो दूसरी तरफ दोबारा रकम जमा करने की नौबत आने की बात कही जा रही है।

लोन वितरण बंद, 150 से अधिक कर्मचारियों ने मांगी जमा राशि वापस!

पुलिसकर्मियों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार बैंक की कथित रिकवरी प्रक्रिया के चलते फिलहाल नए ऋण वितरण पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है। वहीं डेढ़ सौ से अधिक पुलिसकर्मियों द्वारा अपने बैंक खाते बंद कर जमा राशि वापस लेने के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आ रही है।

हालांकि कर्मचारियों का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद उनकी जमा पूंजी वापस मिलने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे बैंक की वित्तीय स्थिति और जमा राशि की उपलब्धता को लेकर कर्मचारियों की चिंता बढ़ती जा रही है।ब्याज की रकम शेयर बाजार में लगाने की भी चर्चाबैंक की वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक और गंभीर आशंका कर्मचारियों के बीच चर्चा में है। कुछ कर्मचारियों द्वारा पूर्व में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज और अन्य वित्तीय लेन-देन की रकम को शेयर बाजार में निवेश किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज अथवा जांच निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में बैंक के संपूर्ण वित्तीय लेन-देन, निवेश, जमा-निकासी और ब्याज भुगतान का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना आवश्यक माना जा रहा है।

दबाव में कर्मचारी, बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि मामले में शिकायत करने पर कार्रवाई का सामना उन्हें ही करना पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते कई कर्मचारी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने विभागीय स्तर पर प्रभावशाली अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

एक महिला अधिकारी की भूमिका और हालिया व्यापक तबादला सूची को लेकर भी चर्चाएं हैं,

हालांकि इन दोनों के बीच किसी संबंध अथवा मिलीभगत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।पुलिस विभाग में अनुशासन का महत्व अपनी जगह है, लेकिन अनुशासन के नाम पर कर्मचारियों की आर्थिक समस्याओं और शिकायतों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि कर्मचारियों की जमा पूंजी को लेकर वास्तव में कोई अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।

साख बचाने के लिए पारदर्शी जांच जरूरी

रायपुर में 1.18 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले का मामला सामने आने के बाद महासमुंद के पुलिस सहकारी बैंक से जुड़ी शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सवाल यह है कि आखिर पुलिसकर्मियों की मेहनत की कमाई का हिसाब कौन देगा?

यदि बैंक में सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान दस्तावेजों के साथ क्यों नहीं किया जा रहा है? और यदि वित्तीय अनियमितता हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों और अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?

महासमुंद पुलिस अधीक्षक और रायपुर रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। बैंक के पिछले वर्षों के ऑडिट, कैशबुक, बैंक स्टेटमेंट, निवेश, ब्याज भुगतान, ऋण वितरण और जमा राशि की स्थिति सार्वजनिक अथवा संबंधित कर्मचारियों के समक्ष स्पष्ट की जाए।क्योंकि पुलिसकर्मियों की जमा पूंजी कोई सरकारी अनुदान नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत की कमाई है। इसकी सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।

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